Summer express, वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में अहवाज़ स्थित शाहिद बघाई अस्पताल का एक हिस्सा, एक हवाई अड्डा और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान प्रभावित हुए। वहीं, जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया।
ईरानी सरकारी मीडिया IRIB के मुताबिक, अमेरिकी हमले में अहवाज़ के शाहिद बघाई अस्पताल के बाल कैंसर उपचार (कीमोथेरेपी) विभाग को नुकसान पहुंचा। इसके बाद अस्पताल में भर्ती 211 मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। अस्पताल में बच्चों समेत कई कैंसर मरीजों का इलाज चल रहा था। हालांकि अस्पताल को हुए नुकसान और हमले के संबंध में अमेरिकी पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी गई। ईरान का दावा है कि कई मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया गया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में एक सैन्य बैरक भी निशाना बना, जहां कम से कम सात सैनिकों की मौत हुई। ईरान का यह भी कहना है कि हालिया अमेरिकी हमलों में अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
दूसरी ओर, IRGC ने दावा किया कि उसने बुधवार रात कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस, बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जॉर्डन स्थित अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल हमले किए। कुवैत ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, जबकि जॉर्डन ने भी तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को निष्क्रिय करने की पुष्टि की है। ईरान ने यह दावा भी किया कि उसकी सेना ने अंदिमेश्क शहर के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, इस दावे की अमेरिका की ओर से पुष्टि नहीं की गई है।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक निगरानी और नाकेबंदी को और सख्त किया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि चेतावनी की अनदेखी करने पर एक खाली तेल टैंकर को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय किया गया। साथ ही दो व्यावसायिक जहाजों का मार्ग भी बदला गया। अमेरिका ने ग्रेटर तुंब द्वीप पर स्थित ईरानी तटीय रक्षा प्रणाली और क्रूज मिसाइल ठिकानों पर भी कार्रवाई करने की जानकारी दी है।
लगातार बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। चार दिनों की लगातार तेजी के बाद गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 84.95 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 79.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।
नोट: इस खबर में शामिल कई सैन्य दावे अमेरिका और ईरान के आधिकारिक बयानों तथा सरकारी मीडिया पर आधारित हैं। युद्ध जैसी परिस्थितियों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल संभव नहीं होती।