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हरियाणा में महिला स्वयं सहायता समूहों को डेयरी के लिए मिलेगी पंचायत भूमि, सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश

Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पंचायत भूमि पर डेयरी संचालन के लिए 500 गज तक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत पात्र समूहों को प्रारंभिक तौर पर पांच वर्ष के लिए भूमि पट्टे पर दी जाएगी, जिसे बेहतर कार्य प्रदर्शन के आधार पर तीन वर्ष तक और बढ़ाया जा सकेगा।

हरियाणा पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही सभी जिलों में तीन सदस्यीय समितियों का गठन किया गया है, जिनमें जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को पात्र समूहों से आवेदन प्राप्त कर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

योजना का लाभ केवल उन्हीं स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा, जो कम से कम एक वर्ष से सक्रिय रूप से कार्यरत हों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में पंजीकृत हों। समूह में न्यूनतम 10 सदस्य होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा नियमित बचत, ऋण संबंधी रिकॉर्ड, बैठकों में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति तथा सरकारी योजनाओं या बैंकों से जुड़े किसी भी विवाद से मुक्त होना भी आवश्यक होगा। साथ ही समूह की किसी भी सदस्य के नाम 500 गज या उससे अधिक निजी भूमि नहीं होनी चाहिए।

भूमि आवंटन के लिए स्वयं सहायता समूह या उनकी सहकारी समितियों को ग्राम पंचायत, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा। यदि एक ही भूमि के लिए एक से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो सरपंच की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय समिति लॉटरी के माध्यम से पात्र समूह का चयन करेगी।

पंचायती भूमि का पट्टा देने से पहले ग्राम पंचायत में एक-तिहाई सदस्यों तथा ग्राम सभा में कुल सदस्यों के दसवें हिस्से या 300 सदस्यों (जो भी कम हो) के बहुमत से प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य होगा। इसके बाद प्रस्ताव को खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के माध्यम से आगे भेजा जाएगा। भूमि आवंटन पाने वाले समूहों को प्रति 100 वर्ग गज के हिसाब से प्रतिवर्ष 1,000 रुपये शुल्क भी जमा कराना होगा।

योजना के तहत न्यूनतम 10 पशुओं के डेयरी संचालन के लिए 350 गज भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि आवश्यकता के अनुसार अधिक पशु रखने की अनुमति भी होगी। पट्टे की अवधि सामान्यतः पांच वर्ष रहेगी, जिसे अधिकतम आठ वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी समूह द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित ग्राम पंचायत को पट्टा अवधि पूरी होने से पहले भी उसे रद्द करने का अधिकार होगा।

राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे, डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा और स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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