चिंतपूर्णी (ऊना),विकास -; प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी के दरबार में वार्षिक श्रावण अष्टमी मेले का भव्य शुभारंभ हो गया। मेले के पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से पूरा चिंतपूर्णी क्षेत्र भक्तिमय नजर आया। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार ‘जय माता दी’ के जयकारे गूंजते रहे।श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने तड़के करीब 3 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए। इससे पहले विधिवत मंगला आरती का आयोजन किया गया। कपाट खुलते ही दर्शन के लिए कतारों में खड़े श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला और श्रद्धालु माता रानी की पवित्र पिंडी के दर्शन के लिए आगे बढ़ने लगे।
इस बार मेले को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चिंतपूर्णी पहुंचे हैं। कई भक्त पैदल यात्रा कर माता के दरबार में पहुंचे, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कठिन साधना और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मंदिर पहुंचे।मेले के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की सजावट से मंदिर परिसर का दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। सुबह से ही बाजार और मेला क्षेत्र में भी विशेष चहल-पहल बनी हुई है।मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पुलिस मेला अधिकारी अजय राणा ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए मेला क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने मंदिर में माथा टेकने के बाद सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की कतारों और विभिन्न सुरक्षा चौकियों का जायजा लिया।उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और होमगार्ड जवानों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुविधा का ध्यान रखने को कहा गया।मेला प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। जगह-जगह पुलिस बल तैनात करने के साथ सीसीटीवी कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और ठहरने सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का लक्ष्य है कि भारी भीड़ के बावजूद मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।