Summer express/अंबाला। पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा में हुए घटनाक्रम को लेकर अंबाला लोकसभा सांसद वरुण मुलाना और अंबाला शहर विधायक चौधरी निर्मल सिंह ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों नेता घायल अंबाला छावनी निवासी सुरेंद्र सिंह का हालचाल जानने के लिए आदेश अस्पताल पहुंचे और उनके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने चिकित्सकों से सुरेंद्र सिंह को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने तथा परिवार को आवश्यक सहयोग देने के निर्देश दिए।
सांसद वरुण मुलाना ने घटनाक्रम को प्रशासन की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि यदि 5 तारीख को सामने आई स्थिति को समय रहते गंभीरता से संभाला जाता तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। उन्होंने कहा कि सुरेंद्र सिंह के कथित रूप से गाड़ी के नीचे फंसे रहने और बाद में गुरु सिमरन मांड की गाड़ी पर हुए हमले जैसी घटनाएं कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
वरुण मुलाना ने कहा कि पूरे मामले की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शुरुआत में सभी पक्षों की शिकायतों और आपत्तियों पर समान गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते स्थिति लगातार बिगड़ती गई। उन्होंने कहा कि विवाद को शुरुआती स्तर पर ही दोनों पक्षों को साथ बैठाकर शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए था।
सांसद ने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप करता, सभी पक्षों की बात सुनता और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करता तो मामला जीटी रोड तक पहुंचने से रोका जा सकता था। उन्होंने जीटी रोड पर हुए घटनाक्रम और पुलिस कर्मचारियों के घायल होने की बात पर भी चिंता जताई।वरुण मुलाना ने कहा कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद किन परिस्थितियों में बढ़ा, प्रशासन की ओर से कहां चूक हुई और क्या किसी स्तर पर जानबूझकर तनाव बढ़ाने का प्रयास किया गया।उन्होंने कहा कि अंबाला की पहचान आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के लिए रही है। किसी भी घटना को धार्मिक या राजनीतिक रंग देकर माहौल खराब करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्षता के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखे और सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करे।
वहीं विधायक चौधरी निर्मल सिंह ने कहा कि पंजोखरा साहिब का घटनाक्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अंबाला हमेशा से आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए जाना जाता है, इसलिए ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को शुरुआत में ही संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए था। समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण विवाद बढ़ता चला गया और अब मामला सामाजिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है।चौधरी निर्मल सिंह ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के साथ यह भी सामने आना चाहिए कि कहीं किसी सुनियोजित प्रयास के तहत अंबाला के भाईचारे को नुकसान पहुंचाने और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ाने की कोशिश तो नहीं की गई। उन्होंने सरकार से बिना किसी राजनीतिक दबाव के जांच करवाने और दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।
दोनों नेताओं ने कहा कि अंबाला की शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द से किसी को भी खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार को पूरे मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से हटकर निष्पक्षता, संवेदनशीलता और कानून के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।
प्रमुख मांगें
पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच करवाई जाए।
सभी पक्षों की शिकायतों पर समान और निष्पक्ष कार्रवाई हो।
घायलों को बेहतर उपचार और पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहयोग दिया जाए।
अंबाला के भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी प्रयास पर सख्त कार्रवाई हो।