सागर पाहवा | मोहाली
समर न्यूज
बलौंगी में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्य और कथित अवैध पीजी निर्माण अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि विभागीय दावों में भी उलझते नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जिम्मेदारी तय करने को लेकर ही दो अहम विभाग आमने-सामने आ गए हैं, जिससे पूरे मामले में असमंजस और गहरा गया है।
बलौंगी में लगातार नए पीजी और बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो रही हैं। कई जगहों पर निर्माण नियमों की अनदेखी के आरोप भी खुलेआम लग रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी दुविधा इस बात को लेकर है कि आखिर बलौंगी पर किसका अधिकार है।
एसीए गमाडा के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि बलौंगी क्षेत्र अब नगर निगम के अधीन आ चुका है, इसलिए निर्माण की निगरानी, नक्शों की मंजूरी और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पूरी तरह नगर निगम की है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जब इस मुद्दे पर एमटीपी आर्किटेक्ट संदीप सैनी से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने बिल्कुल अलग रुख अपनाते हुए कहा कि बलौंगी अभी नगर निगम के अधीन नहीं आया है। यानी एक ही क्षेत्र को लेकर दो विभागों के दो अलग-अलग दावे सामने आ गए हैं, जिससे स्थिति और भी उलझ गई है।
दुविधा के कारण लोग हो रहे परेशान
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय इस “कन्फ्यूजन” का सीधा फायदा निर्माणकर्ता उठा रहे हैं। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि कई जगह बिना स्पष्ट अनुमति के पीजी और अन्य इमारतों का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। लोगों का सवाल है कि जब जिम्मेदारी ही तय नहीं है, तो कार्रवाई कौन करेगा? यदि क्षेत्र वास्तव में नगर निगम के अधीन आ चुका है, तो निगम को तुरंत सक्रिय होकर ऐसे निर्माणों की जांच करनी चाहिए। वहीं अगर क्षेत्र अभी भी गमाडा के अधीन है, तो संबंधित प्राधिकरण को स्थिति स्पष्ट कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
निर्माण कार्य लगातार जारी
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बलौंगी आखिर किसके अधिकार क्षेत्र में है? दो जिम्मेदार अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों ने आम लोगों की उलझन और बढ़ा दी है। ऐसे में प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह जल्द स्थिति स्पष्ट कर यह बताए कि बलौंगी में निर्माण की अनुमति, निगरानी और अवैध निर्माण पर कार्रवाई का असली अधिकार किसके पास है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई का जिम्मा किसके पास? बलौंगी में निर्माण कार्य लगातार जारी हैं। यदि यह क्षेत्र नगर निगम के अधीन आ चुका है तो निगम को तुरंत जांच कर नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करनी चाहिए। यदि क्षेत्र अभी निगम के दायरे में नहीं है, तो एसीए गमाडा को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होगी। नगर निगम सीमा के भीतर आने वाली कॉलोनियों में भवन नक्शे संबंधित स्थानीय निकाय के उपनियमों के अनुसार स्वीकृत किए जाते हैं, जबकि नगर निगम सीमा से बाहर की कॉलोनियों के लिए गमाडा के भवन नियम लागू होते हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में बलौंगी निगम की सीमा में
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार बलौंगी अब मोहाली नगर निगम की सीमा में शामिल है। पंजाब सरकार के स्थानीय निकाय विभाग ने नवंबर 2025 में मोहाली नगर निगम की सीमा विस्तार की अंतिम अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत बलौंगी समेत कई गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया। इससे पहले जारी मसौदा अधिसूचना में बलौंगी को बाहर रखा गया था, जिस पर स्थानीय लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। बाद में अंतिम अधिसूचना में स्थिति बदल गई और बलौंगी को निगम सीमा में शामिल कर दिया गया।