Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के एक सवाल की विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में सराहना की। शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल पर चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सप्लीमेंट्री सवालों में आमतौर पर विधायक भाषण अधिक देते हैं, जबकि सदन में अधिक से अधिक प्रश्न पूछे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सुधीर शर्मा के सवाल के अलावा सप्लीमेंट्री में कोई सवाल उतना स्पेसिफिक नहीं था।
दरअसल, भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रदेश में सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है और इन शिक्षकों को दस महीने का वेतन देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि क्या इन शिक्षकों को अब 12 महीने का वेतन दिया जाएगा।सुधीर शर्मा के इस सवाल के बाद शिक्षा विभाग से संबंधित विषय पर सदन में अन्य विधायकों ने भी सप्लीमेंट्री सवाल पूछने शुरू कर दिए। इससे चर्चा का दायरा बढ़ गया और सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन व्यवस्था तथा उन्हें पूरे साल का वेतन दिए जाने को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी।विधानसभा अध्यक्ष ने इसी दौरान सदस्यों द्वारा पूछे जा रहे सवालों और सप्लीमेंट्री के स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सप्लीमेंट्री में अक्सर भाषण ज्यादा हो जाते हैं। उन्होंने सदस्यों से सवालों को अधिक स्पष्ट और विषय से जुड़ा रखने की बात कही।
अध्यक्ष ने सुधीर शर्मा के सवाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके अलावा सप्लीमेंट्री में कोई प्रश्न उतना स्पेसिफिक नहीं था। अध्यक्ष की इस टिप्पणी के बाद सदन में यह बात चर्चा का विषय बन गई कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सवालों को सीधे मुद्दे से जोड़कर उठाने से सरकार से जवाब हासिल करने में मदद मिलती है।सुधीर शर्मा का सवाल खास तौर पर सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के वेतन से जुड़ा था। दस महीने के वेतन के स्थान पर 12 महीने का वेतन दिए जाने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल से उन शिक्षकों की सेवा शर्तों और वेतन व्यवस्था का मुद्दा सदन के केंद्र में आ गया।सवाल उठने के बाद अन्य विधायकों ने भी इस विषय पर सरकार से जानकारी मांगी। इससे स्पष्ट हुआ कि सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों से जुड़ी वेतन व्यवस्था को लेकर सदस्यों की रुचि है और आने वाले समय में इस विषय पर सरकार से और स्पष्ट जवाब की मांग हो सकती है।