Summer express/मंडी,धर्मवीर-:मंडी स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) में चार वर्ष पहले हुई जेओए आईटी भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने परीक्षा प्रक्रिया और चयन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसपी मंडी की अध्यक्षता में गठित होने वाली कमेटी को मामले के सभी पहलुओं की जांच कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
यह मामला 20 अक्टूबर 2022 को 45 पदों के लिए आयोजित कंप्यूटर आधारित जेओए आईटी परीक्षा से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के तहत 30 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए एक अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में मुख्य तौर पर विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी आशीष शर्मा की पत्नी के चयन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।हाईकोर्ट के समक्ष पेश रिकॉर्ड के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने 5 अगस्त 2022 के कार्यालय आदेश के तहत आशीष शर्मा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। उन्हें परीक्षा से जुड़े मामलों में विश्वविद्यालय और एनएसईआईटी के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद 19 अक्टूबर 2022 के आदेश के तहत परीक्षा के दिन सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक उन्हें कंट्रोल रूम में ड्यूटी पर तैनात किया गया था।
विश्वविद्यालय ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नोडल अधिकारी की भूमिका प्रशासनिक समन्वय तक सीमित थी। प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा केंद्र निर्धारित करने, निरीक्षकों की नियुक्ति, उत्तरों के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने की जिम्मेदारी एनएसईआईटी की थी। विश्वविद्यालय के अनुसार, एनएसईआईटी को भेजे गए ईमेल भी सक्षम अधिकारियों के निर्देश और अनुमति के बाद ही किए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर तैनात पर्यवेक्षकों ने भी परीक्षा प्रक्रिया के सुचारु रूप से संपन्न होने और किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने की रिपोर्ट दी थी।
हालांकि, अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जांच का दायरा नोडल अधिकारी की भूमिका तक भी पहुंच गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि उनकी भूमिका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परीक्षा प्रक्रिया अथवा परिणाम को प्रभावित करने वाली थी या नहीं। साथ ही चयन प्रक्रिया में उनकी पत्नी के चयन से जुड़े सभी तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी।
हाईकोर्ट ने एसपी मंडी को कम से कम पांच सदस्यों वाली जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग का कम से कम एक सदस्य शामिल होगा। इसके अलावा याचिकाकर्ता और निजी प्रतिवादी को भी जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
एसपीयू के कुलपति ललित कुमार अवस्थी ने मंडी में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला उनके पदभार संभालने से पहले का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती परीक्षा बाहरी एजेंसी के माध्यम से करवाई गई थी। कुलपति ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय जांच में हरसंभव सहयोग करेगा और जांच एजेंसी को आवश्यक रिकॉर्ड एवं जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।अब सभी की नजरें एसआईटी की जांच और हाईकोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट पर हैं। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वर्ष 2022 की जेओए आईटी भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या कहीं किसी स्तर पर चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।