समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब में विभिन्न सरकारी कर्मचारी संगठनों की महा-हड़ताल के कारण गुरुवार को सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ। करीब तीन लाख कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल में शामिल हुए, जबकि करीब साढ़े तीन लाख पेंशनरों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। राज्य के सरकारी दफ्तरों, जिला और तहसील कार्यालयों तथा कई अन्य विभागों में नियमित कामकाज प्रभावित रहा। कर्मचारी संगठनों के अनुसार 150 से अधिक यूनियनें आंदोलन में शामिल हैं।
सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाएं भी प्रभावित रहीं। हालांकि आपातकालीन सेवाएं, भर्ती मरीजों की देखभाल और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं जारी रखी गईं। अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल और होशियारपुर की सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में ओपीडी बंद रहने की जानकारी सामने आई। राज्य की सरकारी बस सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान सड़कें जाम नहीं की जाएंगी और निजी प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कोई अपील नहीं है।
कर्मचारी संगठन 18 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता (डीए) जारी करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा न्यूनतम वेतन लागू करने, एसीपी योजना बहाल करने, 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों को पंजाब वेतनमान का लाभ देने और अन्य भत्तों से जुड़े मुद्दे भी उनकी मांगों में शामिल हैं। संगठनों का कहना है कि इन मांगों को लेकर सरकार से कई दौर में आश्वासन मिले, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकला।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि लंबित डीए को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद बकाया राशि का पूरा भुगतान नहीं किया गया। सरकार की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि पूर्व सरकारों से विरासत में मिले बकाये में से बड़ी राशि का भुगतान किया जा चुका है और शेष राशि जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।
बातचीत, विरोध साथ-साथ नहीं: सीएम
महा-हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच जालंधर के पंजाब आर्म्ड पुलिस परिसर में बैठक प्रस्तावित थी। बाद में मुख्यमंत्री ने बैठक रद्द कर दी। मान ने कहा कि कर्मचारी सरकार का हिस्सा हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बातचीत और विरोध साथ-साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पहले हड़ताल खत्म करें, इसके बाद बातचीत की जाएगी। बैठक रद्द होने के बाद कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ी। कुछ नेताओं ने आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने की चेतावनी दी। पंजाब सचिवालय में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
जालंधर में हंगामा, सीएम ने बैठक टाली
पंजाब में कर्मचारियों की महा-हड़ताल के बीच जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ प्रस्तावित बैठक टलने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ते और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने समेत मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती। इसके बाद कर्मचारी भड़क गए और उपायुक्त कार्यालय परिसर से बाहर निकलने की कोशिश की। पुलिस ने मुख्य द्वार बंद कर रास्ता रोका, जिसके बाद कुछ कर्मचारियों ने दीवार फांदकर बाहर आने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।