गुरशरण सिंह। मोहाली
समर न्यूज
आधुनिक दौर में बदलते तौर-तरीकों और बढ़ती महंगाई ने भाई-बहन के रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन पहले के मुकाबले महंगा कर दिया है। इस वर्ष देशभर में रक्षाबंधन के दौरान 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी व खर्च होने का अनुमान है।
महंगाई के बावजूद बाजारों में राखी, मिठाइयों, सूखे मेवों, कपड़ों, आभूषणों और अन्य उपहारों की खरीदारी को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है। अनुमान के मुताबिक, बहनों की ओर से भाइयों के लिए राखियां खरीदने पर करीब 24 हजार करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा मिठाइयों, सूखे मेवों और अन्य खान-पान की वस्तुओं पर भी पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।
वहीं, बदलते समय के साथ राखी पर भाइयों की ओर से बहनों को उपहार देने का चलन भी बढ़ा है। पहले जहां शगुन के तौर पर नकद राशि देने की परंपरा अधिक थी, वहीं अब कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोबाइल फोन, घड़ियां, सोने-चांदी के आभूषण, पर्स और अन्य उपहार देने की प्रवृत्ति बढ़ी है। अनुमान है कि भाई अपनी बहनों के लिए उपहार खरीदने पर करीब 35 हजार करोड़ रुपये खर्च कर सकते हैं।
विदेश में भी बढ़ी मांग: स्वदेशी राखियों की लोकप्रियता विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी बढ़ी है। राखी तैयार करने में महिला कारीगरों की बढ़ती भागीदारी और नए डिजाइनों को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। ऑनलाइन माध्यम से विदेशों में रहने वाले भारतीय भी राखियां मंगवा रहे हैं। महंगाई के बावजूद रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में उत्साह बना हुआ है। हालांकि, राखी के साथ मिठाइयों, सूखे मेवों और उपहारों की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ऐसे में इस बार त्योहार भाई-बहन के रिश्ते की खुशियां तो बढ़ा रहा है, लेकिन बढ़ती महंगाई ने इसके बजट को भी प्रभावित किया है।
बाजारों में बढ़ी खरीदारी, राखियों की मांग पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी
रक्षाबंधन से पहले देश के थोक और खुदरा बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ बढ़ गई है। ऑनलाइन खरीदारी में भी तेजी आई है। राखी और इससे जुड़े उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री भी इस बार बढ़ने का अनुमान है। इस वर्ष बाजार में स्वदेशी राखियों की मांग भी बढ़ी है। कुल राखी खरीदारी में 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी स्वदेशी राखियों की होने का अनुमान है। भारतीय कारीगरों, खासकर महिला कारीगरों की ओर से तैयार की गई आकर्षक और नए डिजाइन वाली राखियां लोगों को पसंद आ रही हैं। जयपुर, बिहार के विभिन्न शहरों, नागपुर, दिल्ली, लुधियाना और कोलकाता में तैयार होने वाली स्वदेशी राखियों की मांग पिछले वर्ष की तुलना में करीब दोगुनी होने की बात कही जा रही है।
चीनी ने बढ़ाई चिंता: मिठाई कारोबार पर पड़ सकता है असर
रक्षाबंधन से पहले चीनी के दाम बढ़ने से मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ने की चिंता है। चीनी महंगी होने का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ सकता है, क्योंकि लड्डू, बर्फी, गुलाब जामुन और अन्य मिठाइयों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। मिठाई विक्रेताओं के अनुसार, चीनी के साथ दूध, खोया, घी और सूखे मेवों जैसी सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी पहले ही लागत बढ़ा रही है। ऐसे में त्योहार के दौरान मिठाइयों के दाम और बढ़ सकते हैं। इसका असर उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि मांग को देखते हुए वे कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी से बचने की कोशिश करेंगे।