भराव का दौर 15 सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद; भाखड़ा 64% भरा, पौंग व रणजीत सागर में भी स्तर 2025 से नीचे
समर न्यूज | रूपनगर
मानसून के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ पंजाब के प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति चिंता बढ़ाने लगी है। भाखड़ा, पौंग और रणजीत सागर बांधों में जलस्तर और पानी की आवक पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले कम दर्ज की गई है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जलाशयों में पानी की स्थिति सहयोगी राज्यों की जरूरतें पूरी करने के लिहाज से संतोषजनक है। जलाशयों में भराव का दौर 15 सितंबर तक जारी रहने की उम्मीद है। भाखड़ा जलाशय में 27 अगस्त को जलस्तर 1,634.22 फुट दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 1,671.49 फुट था। यानी इस बार जलस्तर 37.27 फुट कम है। जलाशय में 3.61 अरब घन मीटर जीवित भंडारण है और यह करीब 64 प्रतिशत भरा है। पिछले साल यह 93 प्रतिशत भरा था और जीवित भंडारण 5.25 अरब घन मीटर था।
भाखड़ा में 27 अगस्त को पानी की आवक 30,452 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल इसी दिन 58,997 क्यूसेक पानी आया था।
खेती और बिजली पर नजर
कम जलस्तर का असर आने वाले महीनों में सिंचाई और बिजली उत्पादन की योजना पर पड़ सकता है। हालांकि अभी जलाशयों में उपलब्ध पानी को मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है। अधिकारियों की नजर अब मानसून के बचे दिनों में होने वाली बारिश और हिमाचल के जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी पर है।
बारिश की कमी बनी वजह
इस साल पंजाब में मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। कम बारिश के कारण प्रमुख बांधों में पानी की आवक भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रही। जुलाई के अंत में भी तीनों प्रमुख जलाशयों का जलस्तर पिछले दो दशकों के औसत से नीचे दर्ज किया गया था। जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के सामने अब सितंबर के मध्य तक जलाशयों में अधिक से अधिक पानी जुटाने की चुनौती है। यदि मानसून के अंतिम दौर में अच्छी बारिश होती है तो मौजूदा कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल तीनों प्रमुख बांधों में पिछले साल के मुकाबले कम भंडारण के कारण अगले रबी मौसम की पानी की उपलब्धता पर भी नजर रखी जा रही है।