समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पंजाब चुनाव से जुड़े पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की।
मुलाकात के दौरान पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, आगामी विधानसभा चुनाव और दोनों दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अभी गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात के बाद भाजपा-अकाली दल के दोबारा साथ आने की चर्चा लगातार तेज हुई है। दोनों दल 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर अलग हो गए थे। इसके बाद 2022 का विधानसभा और 2024 का लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने अलग-अलग लड़ा था। संभावित गठबंधन में सबसे अहम मुद्दा सीटों का बंटवारा माना जा रहा है।
पुराने गठबंधन में अकाली दल बड़े साझेदार की भूमिका में था और विधानसभा की 117 सीटों में से 94 पर चुनाव लड़ता था, जबकि भाजपा 23 सीटों पर मैदान में उतरती थी। इस बार भाजपा अपनी राजनीतिक स्थिति को पहले से मजबूत मान रही है और पुराने फार्मूले पर लौटने के लिए तैयार दिखाई नहीं देती। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक भाजपा अब गठबंधन होने की स्थिति में बराबरी या कम से कम पहले से कहीं अधिक सीटों की हिस्सेदारी चाहती है। दूसरी ओर, अकाली दल भी अपने मजबूत क्षेत्रों को छोड़ने के पक्ष में नहीं होगा। इसलिए सीटों पर सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा है।]
गठबंधन फाइनल या अभी बातचीत
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर भाजपा-अकाली गठबंधन को फाइनल कहना जल्दबाजी होगी। दोनों दलों के बीच संपर्क और संभावित सीट बंटवारे को लेकर बातचीत के संकेत जरूर मजबूत हुए हैं। भाजपा सार्वजनिक तौर पर 117 सीटों पर तैयारी कर रही है, जबकि अकाली दल गठबंधन के पक्ष में संकेत दे रहा है। आने वाले दिनों में सीटों की संख्या, किस विधानसभा क्षेत्र से कौन दल चुनाव लड़ेगा और नेतृत्व की भूमिका जैसे मुद्दों पर तस्वीर साफ हो सकती है। यदि दोनों दल समझौते तक पहुंचते हैं तो 2027 का चुनावी गणित काफी बदल सकता है। फिलहाल दोनों तरफ से बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन अंतिम समझौते की घोषणा का इंतजार है।
117 सीटों की तैयारी जारी
गठबंधन की चर्चाओं के बीच भाजपा ने अपनी संगठनात्मक तैयारी धीमी नहीं की है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पंजाब में संगठन की समीक्षा के दौरान सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी तैयारी मजबूत करने पर जोर दिया था। पार्टी के भीतर भी एक वर्ग अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में है। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा गठबंधन की संभावना खुली रखते हुए भी अपने संगठन को किसी समझौते पर निर्भर नहीं करना चाहती। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी पहले कह चुके हैं कि गठबंधन पर फैसला उचित समय पर लिया जाएगा। यानी पार्टी ने अभी अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है।