255 भारतीय अब भी लापता, दोबारा बाढ़ के खतरे से बचाव अभियान प्रभावित
एजेंसी | काठमांडू
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी एक और झील फटने के बाद प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। यह झील चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। चीन ने इसके फटने की आशंका एक दिन पहले ही जताई थी। झील फटने के बाद पानी का स्तर बढ़ने लगा है।
खतरे की वजह से के रसुवा
जिले में रेस्क्यू ऑपरेशन 90 मिनट के लिए रोक दिया गया है।
भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के पास के कई गांव खाली कराए जा रहे हैं। लोगों और सुरक्षाकर्मियों को तुरंत सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया है।
वहीं, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 552 हो गई है। नेपाल पुलिस के अनुसार, 1,545 लोगों को घायल अवस्था में बचाया गया है। 26 अगस्त को रसुवा जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। पानी, मलबे और चट्टानों के तेज बहाव से सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 कर्मचारी और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। तमिलनाडु के बचाए गए 21 नागरिक काठमांडू पहुंच चुके हैं और उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया जारी है।
तिब्बत में फंसे करीब 200 भारतीयों ने मांगी मदद: विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 255 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें जलविद्युत परियोजना के कर्मचारी, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु और विभिन्न राज्यों के पर्यटक शामिल हैं। भारत ने स्थिति पर नजर रखने और प्रभावित भारतीयों की सहायता के लिए 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय किया है। वहीं, तिब्बत में फंसे करीब 200 भारतीयों ने भी भारत से निकासी में मदद मांगी है।
बचाव अभियान जारी: नेपाली सेना और अन्य सुरक्षा बल हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। रसुवा में जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष दल लगाया गया है और दो कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। प्रशासन नदियों के जलस्तर और संभावित नए बहाव पर लगातार नजर रख रहा है। वहीं मृतकों व लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है।