एजेंसी | लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की करीब 25 करोड़ आबादी को चुनौती के बजाय बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बड़ी और युवा आबादी को कौशल, अवसर और सही मंच उपलब्ध कराया जाए तो यही संख्या आर्थिक विकास का आधार बन सकती है। मुख्यमंत्री ने यह बात लखनऊ में युवा उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों के कार्यक्रम में कही।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 107 स्टार्टअप को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि और नौ इन्क्यूबेटर को 1.79 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की। उन्होंने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 की पुस्तिका जारी करने के साथ उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल भी शुरू किया। इस दौरान 12 नए इन्क्यूबेटर को मान्यता दी गई। योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 120 स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है। इनमें आठ स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप नीति और संस्थागत सहयोग से उद्यमिता का माहौल मजबूत हुआ है। वर्ष 2019 में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के साथ ‘फंड ऑफ फंड्स’ की स्थापना भी की गई थी। मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधी आबादी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनका जोर इस बात पर था कि शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता को एक-दूसरे से जोड़कर युवाओं के लिए व्यापक अवसर तैयार किए जाएं।
नई तकनीक पर जोर: योगी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से पारंपरिक पाठ्यक्रमों से आगे बढ़कर नवाचार और शोध पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि उभरती तकनीकों के लिए सरकार हरसंभव सहयोग देगी। इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष तकनीक, ड्रोन, रोबोटिक्स और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। राज्य में एक दर्जन से अधिक उत्कृष्टता केंद्र संचालित या विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी देश की करीब छठी हिस्सेदारी है, जबकि स्टार्टअप में राज्य की हिस्सेदारी लगभग दसवां हिस्सा है। उनका लक्ष्य है कि देश के कुल स्टार्टअप में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंचे। इसके लिए कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और नवाचार का मजबूत तंत्र तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।