Summer express /शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश में लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर पेंशनरों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदेशभर से पहुंचे पेंशनरों ने राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पेंशनरों ने लंबे समय से लंबित डीए/डीआर एरियर, संशोधित वेतनमान के बकाये और मेडिकल रिइम्बर्समेंट के बिलों का जल्द भुगतान करने की मांग उठाई।प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर पेंशनरों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें अपने ही हक के पैसे के लिए आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पेंशनरों ने साफ किया कि अगर सरकार ने उनकी लंबित मांगों पर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान चौड़ा मैदान में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब धरना स्थल से वाहनों की आवाजाही को लेकर पेंशनरों और पुलिस के बीच बहस हो गई। पेंशनरों के विरोध को देखते हुए पुलिस को कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी और ट्रैफिक को दूसरे मार्ग से डायवर्ट करना पड़ा।
सरकार के वादे पूरे न होने का आरोप
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी पूरी जवानी हिमाचल प्रदेश की सेवा में लगा दी, आज वही बुजुर्ग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि 13 मई को सचिवालय में हुई बैठक के दौरान 31 जुलाई से पहले ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव एनकैशमेंट और एरियर समेत लंबित देनदारियों की 40 प्रतिशत अदायगी का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बाद में अगस्त में नोटिफिकेशन जारी कर भुगतान को अलग-अलग ग्रेडेशन में बांट दिया गया।उन्होंने दो टूक कहा कि पेंशनर्स सरकार से कोई खैरात नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपने हक और अपनी मेहनत से अर्जित धन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंशनरों की मांगों को राजनीतिक तरीके से टालने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
करीब 7 हजार करोड़ रुपये की देनदारी बाकी होने का दावा
सुरेश ठाकुर के मुताबिक प्रदेश में पेंशनरों की संख्या करीब 1 लाख 90 हजार से अधिक है। उनका दावा है कि पेंशनरों की कुल देनदारी कभी लगभग 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, जिसमें करीब 5 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद लगभग 7 हजार करोड़ रुपये की देनदारी अभी भी लंबित है।उन्होंने सरकार पर प्राथमिकताएं तय करने में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर विभिन्न पदों, सलाहकारों, चेयरमैन और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से अपने बकाये का इंतजार कर रहे पेंशनरों को भुगतान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।उन्होंने यह भी दावा किया कि एरियर और अन्य देनदारियों का भुगतान नहीं होने के कारण कई बुजुर्ग पेंशनर अपने हक का पैसा देखे बिना ही दुनिया से चले गए।
अगला आंदोलन होगा और उग्र
पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने अब सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। सुरेश ठाकुर ने कहा कि समिति की ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक जल्द होगी और उसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।उन्होंने कहा कि पेंशनर्स फिलहाल शिमला से वापस जाने वाले नहीं हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि प्रदेश के पेंशनर एकजुट हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।