Summer express/ऊना, राकेश-: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने बुधवार को ऊना स्थित लता मंगेशकर कला केंद्र में ‘एक से श्रेष्ठ’ पहल के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम में प्रदेश में संचालित 650 शिक्षा केंद्रों की उपलब्धि और इनके माध्यम से हजारों जरूरतमंद बच्चों को मिल रही निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन एवं पोषण सहायता को रेखांकित किया गया।‘एक से श्रेष्ठ’ पहल के तहत वर्तमान में 12 हजार से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पूरक शिक्षा और व्यक्तित्व निर्माण का अवसर मिल रहा है। इस पहल की खासियत यह है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की बुनियादी जरूरतों और पोषण का भी ध्यान रखा जाता है। कार्यक्रम में राज्यपाल और सांसद ने ‘एक्ट टू ट्रांसफॉर्म फाउंडेशन’ तथा इस अभियान से जुड़े शिक्षकों, स्वयंसेवकों और समुदाय के प्रयासों की सराहना की।
समारोह के दौरान शिक्षा केंद्रों के शिक्षकों को डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए टैबलेट और लैपटॉप वितरित किए गए। वहीं विद्यार्थियों को स्टडी टेबल वाले बैग, पेंसिल बॉक्स, नोटबुक, जूते और ट्रैकसूट सहित आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। आयोजकों के अनुसार, इस पहल ने शिक्षा के साथ सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला है। कार्यक्रम से 692 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं, जिनमें करीब 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसके अलावा 12 हजार से अधिक परिवारों को सामूहिक रूप से 5.40 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का लाभ मिला है।राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शिक्षकों और स्वयंसेवकों को इस अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए युवाओं से बड़े सपने देखने और जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और कौशल विकास में किया गया निवेश प्रदेश के भविष्य को मजबूत करने वाला निवेश है।सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि ‘एक से श्रेष्ठ’ केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने वाला व्यापक सामाजिक अभियान है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का विद्यार्थियों के बीच समय बिताना और उन्हें प्रेरित करना उनके लिए उत्साहवर्धक है।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास और समावेशी सोच से प्रेरणा लेकर हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में 5 अक्टूबर 2021 को ‘एक से श्रेष्ठ’ की शुरुआत की गई थी। बिना सरकारी सहायता शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से बेरोजगारी, पलायन और आर्थिक चुनौतियों से निपटने में योगदान देना है।आज 650 के करीब केंद्रों के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 12 हजार से अधिक बच्चों को निःशुल्क कोचिंग, संस्कार, मार्गदर्शन और व्यक्तित्व निर्माण की शिक्षा दी जा रही है।