Summer express, चंडीगढ़ I चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर अब वार्डों के बीच भी प्रतिस्पर्धा होगी। नगर निगम ने स्वच्छ वार्ड रैंकिंग की 30 दिवसीय प्रतियोगिता शुरू कर दी है। इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों को विकास कार्यों के लिए 50 लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाएगी। नगर निगम साल में दो बार स्वच्छ वार्ड रैंकिंग करेगा। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस पहल की शुरुआत की और नगर निगम की पहल की सराहना की।
मेयर सौरभ जोशी और नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने बताया कि वार्डों को तीन श्रेणियों में बांटकर रैंकिंग की जाएगी। इसमें गांव, सेक्टर तथा स्लम, कॉलोनी और रिहैबिलिटेशन कॉलोनियां शामिल होंगी। प्रत्येक श्रेणी में प्रथम स्थान वाले वार्ड को 50 लाख रुपये, द्वितीय को 30 लाख रुपये और तृतीय स्थान वाले वार्ड को 20 लाख रुपये दिए जाएंगे। यह राशि संबंधित वार्ड में विकास कार्यों पर खर्च होगी।
खास बात यह है कि पुरस्कार राशि से होने वाले विकास कार्य नगर निगम अपने स्तर पर तय नहीं करेगा। संबंधित वार्ड के लोग, स्कूल, मार्केट एसोसिएशन, RWA और अन्य स्थानीय संस्थाएं तय करेंगी कि पुरस्कार राशि से अपने क्षेत्र में किस तरह का विकास कराया जाना चाहिए।
30 दिन तक चलेगी प्रतियोगिता
कमिश्नर अमित कुमार ने बताया कि 30 दिन तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में स्वच्छता के विभिन्न मानकों पर वार्डों का मूल्यांकन किया जाएगा। रैंकिंग में करीब 80 प्रतिशत वेटेज शहर की वास्तविक स्वच्छता संबंधी समस्याओं को दिया गया है। कचरा सेग्रीगेशन, Bulk Waste Generators (BWG) की पहचान, Visible Piling समेत अन्य मानकों को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने पहले सामान्य सरकारी मानकों के आधार पर रैंकिंग की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मूल्यांकन पैटर्न में बदलाव किया गया। इसका उद्देश्य उन कमियों पर काम करना है, जहां शहर को वास्तव में सुधार की जरूरत है।
पार्षद होंगे अपने वार्ड के लीडर
कमिश्नर ने कहा कि पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों को इस अभियान में लीड भूमिका दी गई है। वार्ड स्तर पर पार्षद लोगों, स्कूलों, बाजारों और विभिन्न संगठनों को अभियान से जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि शहर की करीब 12 लाख आबादी को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी सभी जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों की है।
मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि लोगों को अपने घर से स्वच्छता की शुरुआत करनी होगी। घर के आसपास के पार्क, बैक साइड लाइन और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना भी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
चार डिब्बों में अलग-अलग डालना होगा कचरा
कार्यक्रम में कचरा सेग्रीगेशन को लेकर विद्यार्थियों से सवाल भी किए गए। बताया गया कि हरे डिब्बे में Wet Waste, नीले में Dry Waste, लाल में Sanitary Waste और काले डिब्बे में Residual Waste डाला जाना चाहिए।
कमिश्नर ने बताया कि चंडीगढ़ में प्रतिदिन करीब 500 टन कूड़ा उठाया जाता है और शहर में 100 प्रतिशत से अधिक प्रोसेसिंग क्षमता उपलब्ध हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि घर से ही कचरे की सही सेग्रीगेशन हो तो उसके प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।
स्कूलों में स्वच्छता कार्यशालाएं, बच्चों को बनाया जा रहा स्वच्छता दूत
नगर निगम की ओर से पिछले वर्ष शुरू किए गए स्कूल स्टार अवॉर्ड्स का भी आयोजन किया गया। कमिश्नर ने बताया कि स्कूलों में नियमित स्वच्छता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। मंगलवार और गुरुवार को आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में नगर निगम के अधिकारी, पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधि विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूल स्वच्छता की पाठशाला हैं। यहां से बच्चे स्वच्छता दूत बनकर घर, बाजार और समाज तक संदेश पहुंचा सकते हैं।
कटारिया बोले- वार्ड रैंकिंग को हर महीने कराने पर करें विचार
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने नगर निगम की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता को साल में दो बार के बजाय हर महीने कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हर महीने बेहतर वार्डों को सम्मानित किया जाएगा तो लोगों और पार्षदों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा होगी और स्वच्छता अपने आप गति पकड़ेगी।
उन्होंने कहा कि रैंकिंग के लिए स्पष्ट अंक प्रणाली पहले से तय होनी चाहिए। केवल सड़क की सफाई को आधार न बनाया जाए, बल्कि पार्क, स्कूल परिसर, बाजार, खेल मैदान और घरों की स्थिति को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाए। इससे लोगों को पता रहेगा कि उन्हें किन मानकों पर अंक मिलेंगे और वे अपनी कमियों में सुधार कर सकेंगे।
कटारिया ने कहा कि घनी आबादी वाली कॉलोनियों और पुनर्वास कॉलोनियों की परिस्थितियां बड़े और खुले सेक्टरों से अलग हैं। इसलिए इनके लिए अलग श्रेणी बनाना उचित है। उन्होंने समान अवसर देने पर जोर देते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में लोग अधिक कठिन परिस्थितियों में रहते हैं, उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्वच्छता से बदली लोगों की मानसिकता
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से लोगों की मानसिकता में बड़ा बदलाव आया है। अब बच्चे भी सड़क पर गिरी चीज को उठाकर कूड़ेदान में डालने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन नागरिक सहयोग नहीं करेंगे तो शहर को गंदा होने से रोकना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि पहले दुकानदार दुकान साफ करने के बाद कूड़ा सड़क पर डाल देते थे, लेकिन अब लोगों में यह समझ विकसित हो रही है कि सड़क भी उनकी ही है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच सीधा संबंध बताते हुए उन्होंने कहा कि साफ वातावरण में बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
2047 तक जीरो वेस्ट चंडीगढ़ का लक्ष्य
कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ देश के सबसे बेहतर तरीके से नियोजित शहरों में शामिल है और इसकी पहचान हरियाली, खुली सड़कों, सुखना लेक और व्यवस्थित विकास से है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को दूसरे शहरों से नहीं बल्कि खुद से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।
उन्होंने 2047 तक चंडीगढ़ को जीरो वेस्ट बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि घर के गीले, सूखे और हानिकारक कचरे को अलग करके रीसायकल और रीयूज करना होगा। स्वच्छता किसी एक व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
चंडीगढ़ की हरियाली 38 से बढ़कर 51 प्रतिशत हुई
राज्यपाल ने चंडीगढ़ की हरियाली का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2013-14 में शहर का हरित क्षेत्र करीब 38 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 51 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने स्कूलों में हर्बल गार्डन विकसित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में उपलब्ध छोटी सी जगह में भी बच्चों की मदद से हर्बल गार्डन बनाया जा सकता है। वन विभाग के सहयोग से बच्चों को पौधों की उपयोगिता और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। इससे बच्चों का प्रकृति और मिट्टी से जुड़ाव भी बढ़ेगा।
कटारिया ने स्कूल स्टार अवॉर्ड हासिल करने वाले स्कूलों को बधाई देते हुए कहा कि जो स्कूल इस बार पुरस्कार से चूक गए हैं, वे अगली बार बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता सफलता की सीख देती है, जबकि पुरस्कार मिलने के बाद उस प्रदर्शन को लगातार बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।