Summer express , गुरुग्राम (अनुज पंचाल)। गुरुग्राम में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के बीच किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर हुई अहम बैठक समाप्त हो गई। बैठक में किसान प्रतिनिधिमंडल ने अपनी 9 प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री को मांग पत्र सौंपा। किसानों ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से मांगों पर ठोस कार्रवाई किए जाने के बाद ही वे अपना अंतिम निर्णय लेंगे।
बैठक के दौरान किसानों ने एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमाफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, बिजली संशोधन विधेयक, हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने और किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने सहित कई मुद्दे उठाए।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किसानों की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि बिजली मंत्रालय से संबंधित मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हुई है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनके मंत्रालय से जुड़ी दो प्रमुख मांगों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अन्य मांगों को संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों तक पहुंचाया जाएगा और उन पर जल्द निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में किसानों को यह भी भरोसा दिलाया गया कि बिजली संशोधन विधेयक को सभी संबंधित पक्षों की सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। किसानों ने खेती, पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र को प्रभावित करने वाले किसी भी व्यापार समझौते को लेकर भी अपनी चिंता केंद्रीय मंत्री के सामने रखी। इस संबंध में भी किसानों को सरकार की ओर से आश्वासन मिला है।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि बैठक में 9 मांगों को लेकर विस्तृत और सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत का रुख अच्छा रहा है और उन्हें उम्मीद है कि किसानों की मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। सरकार यदि मांगों को स्वीकार करती है तो किसान उसके निर्णय का स्वागत करेंगे।
किसान नेताओं ने हाईटेंशन बिजली लाइनों के कारण प्रभावित किसानों को मिलने वाले मुआवजे और इससे संबंधित नीति में सुधार का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन और हालिया आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग पर भी चर्चा हुई।
हालांकि, किसान नेता फिलहाल केवल आश्वासनों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से मांगों पर ठोस कार्रवाई किए जाने के बाद ही आंदोलन और आगे की रणनीति को लेकर अंतिम फैसला किया जाएगा। अब संयुक्त किसान मोर्चा की ऑनलाइन बैठक में केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बातचीत पर चर्चा की जाएगी। सभी किसान प्रतिनिधियों और संगठनों की राय लेने के बाद मोर्चा आगे के फैसले की घोषणा करेगा।