Summer express/यमुनानगर/ परवेज़ खान -:हरियाणा में धान की फसल पककर तैयार है और कई इलाकों में कटाई का काम भी शुरू हो चुका है। ऐसे में किसान मंडियों में फसल लेकर पहुंचने की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन धान खरीद शुरू होने से पहले ही एक बार फिर पेंच फंसता नजर आ रहा है। सरकार की ओर से जहां अभी तक धान खरीद की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, वहीं हरियाणा राइस मिलर एसोसिएशन और सरकार के बीच भी सहमति नहीं बन पाई है। यमुनानगर में हुई राइस मिलर्स की बैठक में एसोसिएशन ने साफ कर दिया कि जब तक पुराने भुगतान और नई नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक सरकार के साथ समझौता नहीं किया जाएगा।
खेतों में धान की फसल तैयार खड़ी है। कई जिलों में किसान कटाई शुरू कर चुके हैं और अब मंडियों में फसल की आवक बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन खरीद सीजन शुरू होने से पहले सरकार और राइस मिलर्स के बीच चल रहा विवाद किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।यमुनानगर में हरियाणा राइस मिलर एसोसिएशन की विशेष बैठक हुई। बैठक में मिलर्स ने सरकार के सामने पुराने बकाया भुगतान और नई मिलिंग नीति से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राइस मिलर्स का कहना है कि पिछले दो से तीन वर्षों का भुगतान अभी भी लंबित है और इस मुद्दे को कई बार सरकार और अधिकारियों के सामने उठाया जा चुका है।एसोसिएशन का कहना है कि जब तक पुराने भुगतान का समाधान नहीं होता और नई नीति को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक आगे की प्रक्रिया पर सहमति बनाना मुश्किल है। राइस मिलर्स के इस रुख का सीधा असर धान खरीद व्यवस्था पर पड़ सकता है।
उधर, किसान संगठनों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल खेतों में तैयार है और कटाई के बाद उसे लंबे समय तक घर पर रखना संभव नहीं है। मंडियों में समय पर खरीद नहीं हुई तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।अब सबकी नजर सरकार और राइस मिलर्स के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है। किसानों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द मिलर्स की मांगों का समाधान करे और धान खरीद की तारीख घोषित करे।क्योंकि मंडियों में धान की आवक बढ़ने से पहले अगर सरकार और राइस मिलर्स के बीच सहमति नहीं बनी, तो खरीद व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार समय रहते विवाद सुलझाकर धान खरीद शुरू करवा पाएगी, या किसानों को अपनी तैयार फसल बेचने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा?