Summer express, मोनिका रावत, चंडीगढ़। मोहाली में बिल्डरों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद अब ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) भी जांच के दायरे में आ गई है। ईडी ने गमाडा से पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए सभी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही, संबंधित सीएलयू को मंजूरी देने वाले अधिकारियों और उनके कार्यकाल की जानकारी भी मांगी गई है।
ईडी की प्रारंभिक जांच में सीएलयू मंजूरी की प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी यह जांच कर रही है कि बड़े बिल्डरों और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को सीएलयू जारी करते समय निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं। इस संबंध में गमाडा के पूर्व प्रशासकों और सीएलयू प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ की जा सकती है।
मंगलवार को ईडी ने रॉयल एस्टेट ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। सूत्रों के अनुसार, ग्रुप से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स को एक साल के भीतर तीन सीएलयू मंजूर किए गए थे। इसके अलावा न्यू चंडीगढ़ के सबटेक प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में भी ईडी पहले कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने सीएलयू हासिल करने की प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रोजेक्ट के मालिक को गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान ईडी यह भी पता लगा सकती है कि सीएलयू जारी करने से सरकार को कितना राजस्व प्राप्त हुआ और कहीं नियमों की अनदेखी के कारण सरकारी खजाने को नुकसान तो नहीं हुआ। साथ ही विवादित प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के आधार, बार-बार सीएलयू पाने वाले बिल्डरों और लंबित या अस्वीकृत आवेदनों की भी जांच की जा सकती है।
पिछले पांच वर्षों में गमाडा की ओर से 50 से अधिक सीएलयू जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन सभी मंजूरियों की जांच की जा रही है। बिल्डरों के खिलाफ गमाडा या अन्य विभागों में मिली शिकायतों और उन पर अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
ईडी के अलावा आयकर और जीएसटी विभाग की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। आयकर विभाग बिल्डरों के वित्तीय लेनदेन और खातों की पड़ताल कर रहा है, जबकि जीएसटी विभाग वाणिज्यिक प्रोजेक्ट्स में टैक्स भुगतान और कथित कर चोरी से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है।