Summer express/शिमला,संजू-: कूड़ा प्रबंधन को लेकर अब आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत घरों, व्यावसायिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और अन्य प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। हिमाचल प्रदेश में इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर कमेटियां गठित की गई हैं।राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन केवल सफाई कर्मचारियों या स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना होगा।इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट शामिल हैं। सैनिटरी वेस्ट में डायपर और सैनिटरी पैड, जबकि स्पेशल केयर वेस्ट में सीएफएल, एक्सपायरी दवाइयां, सिरिंज और बैटरियां जैसी वस्तुएं शामिल होंगी। खुले में कचरा जलाने, दबाने अथवा नालियों, नदियों और जलस्रोतों में कचरा फेंकने पर भी रोक रहेगी।
सिंगला के अनुसार बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले Bulk Waste Generators की पहचान की जाएगी और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कार्रवाई की जाएगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं से संबंधित कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए स्कूली विद्यार्थियों को Household Supervisors के रूप में जागरूक करने की योजना है। वहीं, नदियों में कचरा जाने से रोकने के लिए नालों पर जाली और ट्रैश बैरियर लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है।हिमाचल सरकार ने 9 अप्रैल 2026 को राज्य और जिला स्तर की कमेटियां गठित की थीं। अब सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नियमों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।