शिमला/संजू -:देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर के आखिरी दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU के आह्वान पर बैंक कर्मचारी और अधिकारी 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। यूनियनों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना वापस लेने और ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव समेत कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं। UFBU हिमाचल प्रदेश के संयोजक नरिंदर शर्मा के मुताबिक, यदि केंद्र सरकार समय रहते बातचीत के लिए आगे आती है तो हड़ताल को टाला जा सकता है। वहीं, मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में अक्टूबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया जा सकता है।
UFBU हिमाचल प्रदेश के संयोजक नरिंदर शर्मा ने कहा कि बैंक यूनियनों की ओर से 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। यूनियनों की प्रमुख मांगों में बैंकिंग सेक्टर में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू करना शामिल है। इसके तहत शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश देने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम ग्राहकों की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है।
यूनियनों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना को लेकर भी आपत्ति जताई है। UFBU का आरोप है कि फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट यानी DFS की ओर से इस योजना को एकतरफा लागू किया गया। फोरम ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अधिकारियों की ट्रांसफर पॉलिसी पर भी सवाल उठाए हैं। यूनियन के मुताबिक अधिकारियों को हर तीन, पांच, सात और नौ साल के अंतराल पर काफी दूर-दराज के स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।इसके अलावा बैंक यूनियनों ने प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य अवधि के प्रस्ताव का मुद्दा भी उठाया है। UFBU नेताओं का कहना है कि सरकार और बैंक संगठनों के बीच हुए समझौते को ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई मुद्दों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।नरिंदर शर्मा के मुताबिक लंबित मांगों को लेकर यूनियनों ने अब औद्योगिक कार्रवाई का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। हालांकि उनका कहना है कि हड़ताल का उद्देश्य बैंक ग्राहकों को परेशान करना नहीं है। बैंक कर्मचारी और अधिकारी बैंकिंग सेवाओं के महत्व को समझते हैं, लेकिन लंबित मांगों के समाधान के लिए आंदोलन जरूरी हो गया है।
UFBU ने केंद्र सरकार से तत्काल वार्ता शुरू कर विवादित और लंबित मुद्दों का समाधान करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि सितंबर की तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो अक्टूबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर आगे की रणनीति तय की जा सकती है।