समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी।
मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने पूछा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित उस पोस्ट में किए गए दावे की वास्तविक स्थिति क्या है, जिसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। अदालत ने रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यदि घटना हुई थी तो क्या कार्रवाई की गई और यदि नहीं हुई थी तो पोस्ट हटाने तथा उसे प्रसारित करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए। मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।
मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रसारित एक अपुष्ट पोस्ट से हुई थी। इसमें एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और बाद में उसकी मौत की बात कही गई थी। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया है और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि घटना की जांच जारी है, इसलिए इस स्तर पर दावे को सही या गलत घोषित नहीं किया जा सकता।
{हिंसा की जांच जारी: पुलिस ने हिंसा के संबंध में तीन प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें हत्या के प्रयास, लूट और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसे आरोप शामिल हैं। आगजनी की जांच के लिए अलग विशेष जांच दल भी बनाया गया है। पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने, परिसर में तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाओं की जांच की जा रही है।
{सीबीआई जांच की मांग: एलपीयू के छात्र रवि राज ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। याचिका में हिंसा के पीछे बाहरी लोगों की भूमिका समेत कई आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने इन आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है और फिलहाल राज्य से जांच की स्थिति संबंधी
रिपोर्ट मांगी है।