कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को कोलकाता की सड़कों पर जोरदार मार्च निकाला। ये प्रदर्शन उन आठ बंगाली प्रवासी मजदूरों की गिरफ्तारी के खिलाफ था, जिन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस ने कथित तौर पर अवैध प्रवासी बताकर हिरासत में लिया था।
क्या है मामला?
टीएमसी का दावा है कि नादिया जिले के ये आठ मजदूर कानूनी दस्तावेजों के बावजूद कोंडागांव (छत्तीसगढ़) में बिना किसी जानकारी के हिरासत में ले लिए गए। उनके मोबाइल भी जब्त कर लिए गए थे और परिजनों को सूचना तक नहीं दी गई। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
टीएमसी का केंद्र पर हमला
टीएमसी नेताओं ने इस गिरफ्तारी को “राज्य प्रायोजित अपहरण” बताया और भाजपा सरकार को चेताया कि बंगालियों के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषा बोलने वालों को टारगेट किया जा रहा है। यहां तक कि वैध भारतीय नागरिकों को भी एनआरसी के नोटिस भेजे जा रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी पर निशाना
टीएमसी ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे बंगालियों को रोहिंग्या बताकर सांप्रदायिक माहौल बना रहे हैं। पार्टी ने उन्हें “बंगाल और बंगालियों का दुश्मन” बताया।
विपक्ष की भी चिंता
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ओडिशा और महाराष्ट्र में बंगाली मजदूरों पर हो रहे कथित अत्याचारों पर चिंता जताई है। फिलहाल, भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।