summer express , अंबाला। अंबाला में आवारा कुत्तों के झुंड ने 9 वर्षीय बच्चे पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। शाम छोटे कोट कछुआ गांव में करीब 10 से 15 कुत्तों ने बच्चे को घेरकर जमीन पर गिरा दिया और उसके चेहरे, होंठ, सिर सहित शरीर के कई हिस्सों को बुरी तरह नोच लिया। हमले में बच्चे के शरीर पर 30 से अधिक गहरे घाव बताए गए हैं। गंभीर हालत में उसे अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी के लिए PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया।
घायल बच्चे की पहचान अशोक के रूप में हुई है। बिहार के सीतामढ़ी निवासी भरोसी राम का परिवार पिछले करीब दो वर्षों से छोटे कोट कछुआ गांव में खेत मालिक अमन सैनी के खेत में बने कमरे में रहकर मजदूरी कर रहा है। अशोक स्थानीय सरकारी स्कूल में पहली कक्षा का छात्र है। घटना के समय उसके पिता रमेश मजदूरी के सिलसिले में खेत में गए हुए थे।
अशोक की मां रंजू देवी ने बताया कि शाम वह खेत में घास काट रही थी। इसी दौरान उसका छोटा बेटा आदित्य रोते हुए उसके पास पहुंचा और बताया कि कुत्तों ने उसके बड़े भाई को घेर लिया है। यह सुनते ही रंजू देवी घटनास्थल की ओर दौड़ी।
मौके पर पहुंचने पर उसने देखा कि करीब 10 से 15 कुत्ते अशोक को घेरकर उस पर हमला कर रहे थे। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और खेत मालिक अमन सैनी भी वहां पहुंच गए। लोगों ने लाठियों, डंडों और ईंट-पत्थरों की मदद से कुत्तों को भगाया और बच्चे को उनके बीच से बाहर निकाला।
इसके बाद अशोक को गंभीर हालत में अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर मोहित पाठक के अनुसार, बच्चे की छाती और कमर को छोड़कर शरीर के लगभग सभी हिस्सों पर कुत्तों के काटने से 30 से ज्यादा गहरे घाव हैं। चेहरे और होंठ पर भी गंभीर चोटें आई हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, घाव काफी गहरे होने के कारण तत्काल टांके लगाना संभव नहीं था। बच्चे को प्राथमिक उपचार देने के बाद चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी के लिए PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।
PGI ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था होने तक रंजू देवी को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। बच्चे को रेफर किए जाने के बाद वह करीब दो घंटे तक अस्पताल में साथ आए लोगों और आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगती रही। बाद में अस्पताल कर्मचारी अमित ने उसकी आर्थिक सहायता की। रात करीब 8:30 बजे घायल अशोक को एंबुलेंस से PGI चंडीगढ़ भेजा गया।
परिवार के मुताबिक, अचानक हुए हमले से वे सदमे में हैं। बच्चे के चेहरे और शरीर पर आई गंभीर चोटों के कारण परिजन उसके इलाज और आगे की देखभाल को लेकर चिंतित हैं।
रंजू देवी ने बताया कि परिवार पिछले करीब दो वर्षों से गांव में मजदूरी करके अपना गुजारा कर रहा है। खेतों में घास काटने और आसपास के घरों में काम करने से होने वाली आमदनी से परिवार का खर्च चलता है। हादसे के बाद बच्चे के इलाज का खर्च परिवार के लिए एक नई चिंता बन गया है।