लक्की मेहता | लुधियाना
समर न्यूज
नगर निगम का जनरल हाउस सोमवार को विकास के मुद्दों पर चर्चा के बजाय हंगामे, आरोपों और धक्का-मुक्की का अखाड़ा बन गया। गुरु नानक देव भवन में हुई बैठक में विरोध के बीच 34 प्रस्ताव पास कर दिए गए। सबसे ज्यादा बवाल 1208 आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के कार्यकाल को एक साल बढ़ाने और करीब 82 करोड़ रुपये के मैकेनिकल स्वीपिंग प्रोजेक्ट को लेकर हुआ। कांग्रेस और भाजपा पार्षदों ने कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक करने, फिजिकल वेरिफिकेशन कराने और स्वीपिंग प्रोजेक्ट की तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध करवाने की मांग उठाई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि आपत्तियों का समाधान किए बिना प्रस्ताव पास किए गए। कांग्रेस और भाजपा पार्षदों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। बैठक में जीरो आवर की मांग को लेकर पार्षद आमने-सामने आ गए। तीखी बहस के बीच धक्का-मुक्की हुई और पुलिस की मदद से एक पार्षद को सदन से बाहर ले जाया गया। दूसरी ओर, आप पार्षद निधि गुप्ता और सैनिटरी इंस्पेक्टर निशु घई के बीच विवाद के बाद सैनिटरी इंस्पेक्टरों, जेई, एक्सईएन, एसई और स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न शाखाओं के 300 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी सदन से बाहर चले गए। अधिकारियों के इस कदम पर पार्षदों ने नाराजगी जताई। मेयर प्रधान इंद्रजीत कौर ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सफाई कर्मचारियों के ठेके की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में सबसे ज्यादा विवादित रहा। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारियों की तैनाती वार्डों में हो रही है तो संबंधित पार्षदों को उनकी सूची और उपस्थिति का पूरा ब्योरा क्यों नहीं दिया गया। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई वार्डों में कर्मचारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं, लेकिन मौके पर दिखाई नहीं देते।
विपक्ष की लिखित आपत्तियों के बावजूद प्रस्ताव पास करने पर सवाल…
कांग्रेस पार्षदों ने दावा किया कि मैकेनिकल स्वीपिंग प्रोजेक्ट और 1208 सफाई कर्मचारियों के ठेके की अवधि बढ़ाने के खिलाफ विपक्ष की ओर से लिखित आपत्तियां दी गई थीं। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब विपक्षी पार्षदों ने आपत्तियां दर्ज करवाई थीं, तो इन प्रस्तावों को किस आधार पर मंजूरी दी गई। बैठक में फॉगिंग के लंबित कार्य, ठोस कचरा प्रबंधन, वार्डों के विकास और छह कॉलोनियों से संबंधित प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। कुछ पार्षदों ने कहा कि ग्लाडा से जुड़े मामलों का निपटारा उसकी जिम्मेदारी के अनुसार किया जाना चाहिए।
मेयर बोलीं- बहुमत से कानूनी तरीके से पास हुए प्रस्ताव…
हंगामे के बीच 34 प्रस्ताव पास होने के बाद मेयर प्रधान इंद्रजीत कौर ने कहा कि सभी एजेंडे आप पार्षदों के बहुमत से कानूनी और उचित तरीके से पारित किए गए हैं। उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान अधिकारियों के बाहर जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में कमिश्नर को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक के बाद भी 1208 सफाई कर्मचारियों की सूची, फिजिकल वेरिफिकेशन और मैकेनिकल स्वीपिंग प्रोजेक्ट की तकनीकी रिपोर्ट जैसे सवालों पर विवाद बरकरार रहा। कांग्रेस और भाजपा ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
^भाजपा पार्षद रोहित सिक्का और आप पार्षद ईशा ढींगरा ने भी 1208 कर्मचारियों की वार्डवार सूची उपलब्ध करवाने की मांग की। कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने अधिकारियों को सूची जारी करने के निर्देश दिए। फिजिकल वेरिफिकेशन को लेकर सदन में एक सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का आश्वासन दिया गया, जबकि बाद में भाजपा की ओर से 10 दिन की समयसीमा बताए जाने की बात कही गई।
^भाजपा पार्षद भवनीत कौर ने दावा किया कि उनके वार्ड में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 10 सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन मौके पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। भाजपा की ओर से करीब 288 कर्मचारियों के फील्ड में उपलब्ध नहीं होने का आरोप भी लगाया गया। पार्षदों का कहना था कि जब तक कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती की जांच नहीं होती, तब तक ठेके की अवधि बढ़ाने पर सवाल उठते रहेंगे।
^कांग्रेस पार्षद अरुण शर्मा ने हंबड़ा रोड क्षेत्र में करीब 20 अवैध कॉलोनियां विकसित होने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों को विकसित करने से पहले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सहित जरूरी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था होनी चाहिए थी। आरोप है कि कॉलोनियों के विकास के कारण ब्लोके क्षेत्र के एसटीपी पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जबकि प्लांट पहले ही अपनी क्षमता के मुताबिक काम कर रहा है। अरुण शर्मा ने कहा कि यदि कॉलोनियों के सीवरेज का दबाव नगर निगम के मौजूदा एसटीपी पर डाला गया तो इसका खामियाजा आसपास के लोगों को भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कॉलोनियों को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। ये आरोप पार्षद की ओर से लगाए गए; इनकी स्वतंत्र पुष्टि बैठक में सामने नहीं आई।
^आप पार्षद निधि गुप्ता ने अपने वार्ड में सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार, मेयर और विधायक बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ अधिकारी सियासत कर रहे हैं। उनके वार्ड में नियमित सफाई नहीं होती और आरोप है कि दूसरे वार्डों का कूड़ा भी उनके क्षेत्र में फेंका जा रहा है। निधि गुप्ता ने कहा कि इस संबंध में वह कमिश्नर को कई बार शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वह अगले दिन धरना देंगी। इसी मुद्दे पर उनकी सैनिटरी इंस्पेक्टर निशु घई के साथ तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने के बाद विभिन्न विभागों के 300 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी सदन से बाहर चले गए।
^भाजपा पार्षद रुचि विशाल गुलाटी ने वार्ड में स्ट्रीट लाइटों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं मिली और अब दूसरी दिवाली भी आ गई है। उन्होंने वार्ड नंबर 73 में वर्ष 2021-22 से आउटसोर्स पर रखे गए करीब 14 कर्मचारियों की पिछले छह महीने से तनख्वाह नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के परिवारों का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने 1208 सफाई कर्मचारियों की पूरी सूची और मैकेनिकल स्वीपिंग प्रोजेक्ट पर चर्चा के लिए समय देने की मांग की। उनका आरोप था कि इन मुद्दों पर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
^भाजपा पार्षद पूनम रतड़ा ने थाना नंबर-3 के सामने स्थित गुमनाम चौक का नाम पंडित भीम सेन चौक रखने का प्रस्ताव उठाया। उन्होंने वार्ड नंबर 77 में सफाई कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि वार्ड में सफाई कर्मचारियों की जरूरत के बावजूद लंबे समय से समस्या बनी हुई है। पूनम रतड़ा ने कहा कि 1208 आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती के बारे में पार्षदों को जानकारी नहीं है। उन्होंने मांग की कि हर वार्ड में तैनात कर्मचारियों की संबंधित पार्षद से फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जाए, ताकि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान हो सके।