भांजे को कुत्ते के काटने के बाद वैक्सीन के लिए इंतजार करवाने का आरोप
Summer express/देहरा, गुलशन धनोआ-: सिविल अस्पताल देहरा में कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाने में देरी को लेकर विवाद सामने आया है। देहरा के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर विशाल परमार ने अपने भांजे को वैक्सीन लगवाने के लिए दोपहर 12 बजे तक इंतजार करवाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले का वीडियो फेसबुक पर साझा करते हुए अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। दूसरी ओर, अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (SMO) डॉ. दिलशाद ने वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए मरीजों को एकत्रित कर टीकाकरण करने की व्यवस्था का हवाला दिया। वहीं, घायल युवक का उपचार करने वाले डॉ. आशीष ने अपनी ओर से की गई चिकित्सकीय कार्रवाई की जानकारी दी।
भांजे को कुत्ते ने काटा, वैक्सीन के लिए इंतजार का आरोप
विशाल परमार के अनुसार, उनके भांजे को कुत्ते ने हाथ पर कई जगह काट लिया था। इसके बाद वह उसे उपचार के लिए सिविल अस्पताल देहरा लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि युवक को दर्द हो रहा था और चक्कर आने की शिकायत भी थी। अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद उपचार लिखकर इंजेक्शन लगवाने के लिए कहा गया।विशाल परमार का आरोप है कि जब वह वैक्सीन लगवाने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि दोपहर 12 बजे से पहले वैक्सीन की वायल नहीं खोली जाती। उनके अनुसार, अस्पताल की ओर से इसका कारण एक वायल में चार डोज होना और इसकी कीमत करीब सात हजार रुपये बताया गया।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया है, तो उसे आवश्यक उपचार के लिए निर्धारित समय तक इंतजार क्यों करना पड़े? विशाल ने कहा कि वह वैक्सीन के लिए सात हजार रुपये देने को भी तैयार थे, लेकिन घायल को समय पर उपचार मिलना चाहिए था।
फेसबुक पर साझा किए गए वीडियो में उन्होंने दावा किया कि लाइव वीडियो शुरू करने के बाद मरीज को वैक्सीन लगा दी गई। उन्होंने देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर और संबंधित प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार करवाने की अपील की।
SMO डॉ. दिलशाद ने बताई वायल खोलने की व्यवस्था
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अस्पताल के SMO डॉ. दिलशाद ने बताया कि संबंधित मरीज सुबह करीब साढ़े 11 बजे अस्पताल पहुंचा था। उन्होंने कहा कि एंटी-रेबीज वैक्सीन की एक वायल में चार डोज होती हैं। मरीजों की संख्या कम होने पर वायल खोलने के बाद कुछ डोज इस्तेमाल नहीं हो पातीं, जिससे वैक्सीन की बर्बादी की आशंका रहती है।
डॉ. दिलशाद के अनुसार, इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में दोपहर 12 बजे तक आने वाले मरीजों को एकत्रित कर वैक्सीन लगाने की व्यवस्था बनाई गई है। इससे एक ही वायल से कई मरीजों को टीका लगाने में मदद मिलती है और दवा की बर्बादी कम की जा सकती है।उन्होंने यह भी बताया कि पहले अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी रही थी, लेकिन वर्तमान में वैक्सीन उपलब्ध है। संबंधित मरीज को भी निर्धारित व्यवस्था के तहत दोपहर 12 बजे तक इंतजार करने के लिए कहा गया था। अस्पताल प्रशासन का पक्ष है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उपलब्ध वैक्सीन का बेहतर उपयोग करना है।
डॉ. आशीष बोले—सूचना मिलते ही की मरीज की जांच
घायल युवक का उपचार करने वाले डॉ. आशीष ने बताया कि मरीज सुबह करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचा था। उसके बाएं हाथ पर कुत्ते के काटने से कई छोटे घाव थे। उस समय वह वार्ड में भर्ती मरीजों का राउंड ले रहे थे। मरीज की जानकारी मिलने पर उन्होंने राउंड बीच में छोड़कर युवक की जांच की और उपचार की प्रक्रिया शुरू की।डॉ. आशीष ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवक को घाव धोकर आने की सलाह दी। इसके बाद चिकित्सकीय आकलन के आधार पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन दिया जाता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज को शुरुआती चिकित्सकीय सलाह देने के बाद घाव धोने के लिए भेजा गया था। इसके बाद वैक्सीन लगाने वाले स्थान पर क्या बातचीत हुई, इसकी उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है, क्योंकि मरीज उस प्रक्रिया के बाद दोबारा उनके पास नहीं आया।
वैक्सीन की बचत के साथ समय पर उपचार भी जरूरी
इस घटना के बाद अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर अस्पताल प्रशासन वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए मरीजों को एकत्रित करने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर विशाल परमार ने घायल को इंतजार करवाने पर आपत्ति जताई है।कुत्ते के काटने के मामलों में समय पर चिकित्सकीय आकलन और आवश्यक उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं। घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक धोना चाहिए तथा बिना देरी चिकित्सा केंद्र पहुंचना चाहिए। चिकित्सक घाव की प्रकृति और जोखिम के आधार पर वैक्सीन तथा अन्य आवश्यक उपचार की सलाह देते हैं।ऐसे में अस्पतालों के लिए जरूरी है कि वैक्सीन की उपलब्धता और उपयोग का प्रबंधन करते हुए प्रत्येक मरीज की स्थिति का समय पर आकलन किया जाए। देहरा अस्पताल का यह मामला भी इसी सवाल को सामने लाता है कि दवा की बर्बादी रोकने की व्यवस्था और मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार समय पर उपचार देने के बीच उचित संतुलन कैसे बनाया जाए।