पूर्वी, पश्चिमी और सेंट्रल कार्यालयों में नहीं हुई बोली; अधिकारियों ने कहा- मामला ध्यान में नहीं था, अब जल्द शुरू करवाएंगे प्रक्रिया
राजवीर बक्शी | समर न्यूज
लुधियाना
लुधियाना के तीन सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में सरकारी परिसर के भीतर चल रही कैंटीनों के ठेके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, पूर्वी, पश्चिमी और सेंट्रल सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में पिछले करीब तीन साल से कैंटीनों की बोली या ठेका प्रक्रिया नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इन कैंटीनों का नियमित रूप से संचालन हो रहा है, तो इनके ठेके की प्रक्रिया समय पर क्यों नहीं करवाई गई और इस दौरान सरकारी राजस्व का हिसाब किस आधार पर रखा गया।
इन कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग रजिस्ट्री और अन्य सरकारी काम करवाने पहुंचते हैं। लोगों की सुविधा के लिए कैंटीनें संचालित की जा रही हैं, लेकिन इनके संचालन की अनुमति, ठेके की वैधता और किराये से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि सरकारी जगह का इस्तेमाल कैंटीन चलाने के लिए किया जा रहा है, तो संबंधित विभाग के पास इसकी अनुमति, निर्धारित शुल्क और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए।
तीनों कैंटीनों से संभावित राजस्व का अनुमान लगाएं तो मामला और गंभीर नजर आता है। यदि एक कैंटीन का मासिक किराया 10 हजार रुपये माना जाए, तो एक कैंटीन से सालाना 1.20 लाख रुपये और तीन साल में 3.60 लाख रुपये बनते हैं। इस हिसाब से तीन कैंटीनों का तीन साल का अनुमानित किराया 10.80 लाख रुपये बैठता है। हालांकि, यह राशि केवल अनुमानित किराये के आधार पर निकाली गई है। वास्तविक राजस्व, बकाया किराये या सरकारी खजाने को हुए किसी नुकसान की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड, ठेके की शर्तों और भुगतान के विवरण की जांच के बाद ही हो सकती है। फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि अगर तीन साल से बोली नहीं हुई, तो कैंटीनों के संचालन की अनुमति किस आधार पर जारी रही और इनके एवज में कितना राजस्व सरकारी खाते में जमा हुआ।
}अधिकारियों को नहीं थी जानकारी, अब बोली करवाने की बात: एसडीएम कुलदीप बावा के कार्यालय से जानकारी लेने पर बताया गया कि कैंटीनों का ठेका पिछले करीब तीन साल से नहीं हुआ है। एसडीएम कुलदीप बावा ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं था, लेकिन अब कैंटीनों की बोली करवाने के संबंध में जल्द कदम उठाए जाएंगे। वहीं, पूर्वी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की एसडीएम जसलीन कौर से भी इस बारे में बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। वह जल्द ही जानकारी लेकर बोली करवाने की प्रक्रिया शुरू करवाएंगी।