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शिमला की पहाड़ियों में गूंजेगा साइकिलिस्टों का दम, 130 KM के रोमांचक ट्रैक पर होगी कड़ी परीक्षा

23 से 25 अक्टूबर तक सजेगा 13वीं एमटीबी शिमला साइकिल रैली का मंच, 20 शहरों के प्रतिभागी दिखाएंगे दमखम

11 वर्षीय कारिक शर्मा से 68 साल के महेश्वर दत्त तक लेंगे हिस्सा, 3,800 मीटर की कुल चढ़ाई और 8 लाख रुपये के पुरस्कार होंगे आकर्षण

Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की पहाड़ियों में अगले तीन दिन रोमांच, साहस और सहनशक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। घने जंगलों, पथरीली पगडंडियों, खड़ी चढ़ाइयों और चुनौतीपूर्ण उतराइयों के बीच देशभर के माउंटेन बाइकिंग साइकिलिस्ट अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली 13वीं एमटीबी शिमला साइकिल रैली में प्रतिभागियों को लगभग 130 किलोमीटर का चुनौतीपूर्ण सफर तय करना होगा। इस दौरान करीब 3,800 मीटर की कुल चढ़ाई साइकिलिस्टों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी कौशल और मानसिक मजबूती की परीक्षा लेगी। प्रतियोगिता में विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को कुल आठ लाख रुपये के नकद और अन्य पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

हिमालयन एडवेंचर स्पोर्ट्स एंड टूरिज्म प्रमोशन

 एसोसिएशन (HASTPA) की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के करीब 20 शहरों के साइकिलिस्ट भाग ले रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर पोडियम हासिल कर चुके नौ खिलाड़ी भी शामिल हैं। शिमला से 18 और बेंगलुरु से छह प्रतिभागी अपनी चुनौती पेश करेंगे। इसके अलावा जयपुर, दिल्ली, लेह, गुवाहाटी समेत कई अन्य शहरों से भी साइकिलिस्ट प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों की भागीदारी से मुकाबले में रोमांच बढ़ने की उम्मीद है।

उम्र नहीं, जुनून है सबसे बड़ी ताकत

एमटीबी शिमला साइकिल रैली की खासियत यह है कि इसमें उम्र की सीमा से परे साइकिलिंग के प्रति जुनून देखने को मिलेगा। शिमला के 11 वर्षीय कारिक शर्मा प्रतियोगिता के सबसे कम उम्र के प्रतिभागी होंगे, जबकि 68 वर्षीय महेश्वर दत्त सबसे वरिष्ठ साइकिलिस्ट के रूप में हिस्सा लेंगे। दोनों प्रतिभागियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि और आत्मविश्वास उम्र के मोहताज नहीं हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों पर युवा और अनुभवी साइकिलिस्टों के बीच होने वाला मुकाबला दर्शकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।

90 प्रतिशत ट्रैक जंगलों और पगडंडियों से होकर गुजरेगा

आयोजन समिति के संयोजक मोहित सूद के अनुसार, इस वर्ष प्रतियोगिता क्रॉस कंट्री मैराथन प्रारूप में आयोजित की जाएगी। इसमें एक प्रोलॉग और समय के आधार पर परिणाम निर्धारित करने वाले दो मुख्य चरण होंगे। प्रतियोगिता का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सड़क से हटकर जंगलों, संकरी पहाड़ी पगडंडियों और जीप ट्रैकों से होकर गुजरेगा। ऐसे में प्रतिभागियों के लिए केवल तेज गति से साइकिल चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें रास्ते की परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति भी बदलनी होगी।

पथरीले रास्ते, प्राकृतिक जलधाराएं, लंबी चढ़ाइयां और तकनीकी रूप से कठिन उतराइयां साइकिलिस्टों की असली परीक्षा लेंगी। चुनौतीपूर्ण ट्रैक पर संतुलन बनाए रखना, सही समय पर गियर बदलना और ऊर्जा का उचित इस्तेमाल करना जीत की संभावनाओं को प्रभावित करेगा। लगातार बदलते भूभाग में खिलाड़ियों को अपनी गति और तकनीक के बीच तालमेल बैठाना होगा।

इस बार प्रतियोगिता में पहली बार ग्रेवल साइकिलों को भी भाग लेने की अनुमति दी गई है। इससे विभिन्न तरह की साइकिलिंग में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को मुकाबले में शामिल होने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का मानना है कि इस पहल से प्रतियोगिता का दायरा बढ़ेगा और अधिक साइकिलिस्ट इस आयोजन से जुड़ सकेंगे।

24 अक्टूबर को 55 किलोमीटर की कठिन चुनौती

प्रतियोगिता का पहला मुख्य चरण ‘द फ्लाइट ऑफ द फीजेंट’ 24 अक्टूबर को आयोजित होगा। इस चरण में प्रतिभागियों को 55 किलोमीटर की दूरी तय करने के साथ लगभग 1,780 मीटर की चढ़ाई पार करनी होगी। यह रूट कुफरी वन्यजीव अभयारण्य से शुरू होकर मुंडाघाट, गलू और फागू सहित विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए डाक बंगला में समाप्त होगा।इस चरण में खिलाड़ियों की गति, तकनीकी दक्षता और लंबी चढ़ाई के दौरान ऊर्जा बचाकर रखने की क्षमता अहम होगी। जंगलों के बीच से गुजरने वाली संकरी पगडंडियां और पहाड़ी रास्तों की बदलती परिस्थितियां साइकिलिस्टों को लगातार सतर्क रहने के लिए मजबूर करेंगी। शुरुआती चरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अगले दिन की चुनौती के लिए अपनी रणनीति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

25 अक्टूबर को निर्णायक मुकाबले में होगी असली परीक्षा

प्रतियोगिता का दूसरा मुख्य चरण ‘द सीडर रीथ’ 25 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें साइकिलिस्टों को 48 किलोमीटर की दूरी के साथ लगभग 1,280 मीटर की चढ़ाई पूरी करनी होगी। कुफरी वन्यजीव अभयारण्य से शुरू होने वाला यह रूट छराबड़ा, मशोबरा, पुरानी कोटी, कांडा, डाक बंगला, फागू और भेखलटी से होकर मशोबरा पहुंचेगा।लगातार दो दिनों की कठिन राइडिंग के बाद खिलाड़ियों के लिए अपनी गति, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। इस चरण में छोटी-सी चूक भी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। दोनों मुख्य चरणों के परिणाम समय के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे, जिससे हर प्रतिभागी के लिए शुरुआत से लेकर अंतिम पड़ाव तक बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होगा।

प्रतियोगिता के दोनों रूट शिमला के प्रमुख पर्यटन स्थलों से आगे बढ़कर ग्रामीण क्षेत्रों, जंगलों और प्राकृतिक पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरेंगे। इससे खिलाड़ियों को हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता के बीच साइकिलिंग का अनुभव मिलेगा। साथ ही, आयोजन के माध्यम से शिमला में एडवेंचर स्पोर्ट्स और साइकिल पर्यटन को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

सड़क सुरक्षा का संदेश भी देगी रैली

इस बार एमटीबी शिमला साइकिल रैली में खेल और फिटनेस के साथ सड़क सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। HASTPA शिमला पुलिस के सहयोग से सुरक्षित राइडिंग के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है। पत्रकार वार्ता के दौरान शिमला की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेहर पंवर ने हेलमेट के सही इस्तेमाल और यातायात नियमों का पालन करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि साइकिलिंग और अन्य राइडिंग गतिविधियों के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। सड़क पर चलने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी से वाहन चलाने की आदत सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे आयोजन युवाओं को फिटनेस के साथ जिम्मेदार राइडिंग के लिए प्रेरित कर सकते हैं। हर राइड का उद्देश्य सुरक्षित घर वापसी होना चाहिए।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का मौका

मोहित सूद के अनुसार, HASTPA का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि युवाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स से जोड़ना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और साइकिल पर्यटन के माध्यम से समुदायों के लिए नए अवसर तैयार करना भी है। संस्था वर्ष 2005 में एमटीबी हिमालया और वर्ष 2012 में एमटीबी शिमला की शुरुआत के बाद से इस दिशा में काम कर रही है।

हिमाचल पर्यटन के सहयोग से आयोजित होने वाली एमटीबी शिमला साइकिल रैली स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी साइकिलिस्टों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही, यह आयोजन शिमला को एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने और प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को नए अंदाज में सामने लाने में मददगार साबित हो सकता है।

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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