Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर जारी विवाद के बीच ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने हड़ताल कर रहे बिजली कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। इसमें विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई का विकल्प भी शामिल है।
अनिल विज ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए हड़ताली कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर ड्यूटी पर लौटने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में आगे आना चाहिए। सरकार सभी संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए तैयार है।
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर को 25 साल के समानांतर लाइसेंस दिए। इस फैसले के विरोध में बिजली निगमों के कर्मचारी 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का विरोध निजी कंपनी को बिजली वितरण का जिम्मा सौंपने के फैसले को लेकर है।
इससे पहले गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि वह स्वयं बिजली वितरण के निजीकरण के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था पर सरकार का काफी धन और ढांचा लगा हुआ है तथा कर्मचारियों की नौकरियों का सवाल भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से उन्होंने इस फैसले का विरोध किया था। हालांकि, नियामक आयोग का फैसला सरकार के पक्ष में नहीं आया और अब इसके खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करने की तैयारी की जा रही है।
विज ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द अपील दायर कर नियामक आयोग के आदेश पर रोक हासिल की जाए। उन्होंने बताया कि अपील दाखिल करने के लिए 45 दिन का समय है, लेकिन अधिकारी और कानूनी टीम इस मामले में तेजी से काम कर रहे हैं, ताकि पांच से छह दिन के भीतर अपील दायर करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
ऊर्जा मंत्री ने कर्मचारी नेताओं से हड़ताल का रास्ता छोड़कर सरकार के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई की तैयारी में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने सुझाव दे सकते हैं, मामले की पैरवी के लिए अपना वकील नियुक्त कर सकते हैं या किसी अन्य वकील का नाम सुझा सकते हैं। सरकार उपयुक्त सुझावों पर विचार करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित वकील की सेवाएं लेने के लिए तैयार है।
विज ने स्पष्ट किया कि नियामक आयोग के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। उनके अनुसार, इस मामले में न्यायाधिकरण के समक्ष अपील करना ही उचित रास्ता है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे हड़ताल के बजाय बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए समाधान निकालने में सहयोग करें।