शिमला में कांग्रेस और CPI(M) नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; चुनावी गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
Summer express/शिमला/ संजू -: कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस और लेफ्ट एक साथ नजर आ रहे हैं। शिमला में हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने CPI(M) नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। हालांकि, कांग्रेस और लेफ्ट के बीच चुनावी गठबंधन को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्ट के नेता मौजूद रहे, लेकिन कांग्रेस के पोस्टर और बैनर में लेफ्ट का जिक्र नहीं दिखा।
वहीं, रजनी पाटिल ने फ्लाइट का हवाला देते हुए सवालों के जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है। इसी मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित की जाएगी।
रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
रजनी पाटिल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के समय ही उनकी निष्पक्षता को लेकर आशंकाएं जताई गई थीं। पाटिल ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर राजनीतिक दलों को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध का पहला चरण 2 अक्टूबर से शुरू हुआ था, जिसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन किए गए।रजनी पाटिल के मुताबिक, विरोध का दूसरा चरण 26 अक्टूबर से शुरू होगा। इसके तहत जिला स्तर पर प्रेस वार्ताएं की जाएंगी। वहीं, 12 से 25 नवंबर तक विधानसभा स्तर पर राजनीतिक चौपालों का आयोजन होगा। उन्होंने लोगों से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचकर रैली में शामिल होने की अपील की।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CPI(M) नेता राकेश सिंघा और संजय चौहान ने भी कांग्रेस के साथ खड़े होने की बात कही। दोनों नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष संगठनों को एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन कथित वोट चोरी के मुद्दे पर वे कांग्रेस के साथ हैं।
लेफ्ट नेताओं ने केंद्र सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक इस मुद्दे पर एकजुट होकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे।लेफ्ट नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि रैली को रोकने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को कहीं रोका गया, तो वहीं रामलीला मैदान बना दिया जाएगा। हालांकि, कांग्रेस और लेफ्ट की यह एकजुटता फिलहाल कथित वोट चोरी के मुद्दे तक सीमित नजर आ रही है। दोनों दलों के बीच भविष्य में चुनाव साथ लड़ने को लेकर अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है।