Summer express/बिलासपुर, सुभाष -:जिला बिलासपुर के करोट गांव के किसान श्यामलाल ठाकुर पारंपरिक खेती के साथ नई फसलों को अपनाकर किसानों के लिए एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। पिछले तीन-चार वर्षों से लाल मक्की की खेती कर रहे श्यामलाल को इस फसल से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। अच्छी पैदावार के साथ-साथ अब लाल मक्की के आटे और बीज की मांग भी बढ़ने लगी है। इससे उन्हें भविष्य में इस खेती के विस्तार की उम्मीद जगी है।
श्यामलाल ठाकुर ने बताया कि उन्होंने करीब तीन-चार साल पहले लाल मक्की की खेती शुरू की थी। शुरुआत में इस फसल के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे इसकी विशेषताओं के बारे में पता चलने पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी। अब आसपास के लोग उनसे लाल मक्की का आटा और बीज लेने के लिए पहुंच रहे हैं।उन्होंने बताया कि लाल मक्की की पैदावार अच्छी होती है। इसे भूनकर खाने के अलावा इसका आटा तैयार करके भी इस्तेमाल किया जाता है। इसका स्वाद लोगों को पसंद आ रहा है, जिसके चलते कई लोग अपने घरों के लिए इसका आटा ले जा रहे हैं। वहीं, कुछ किसान इसके बीज खरीदकर अपने खेतों में इसकी खेती करने की तैयारी कर रहे हैं।
बीज की मांग बढ़ने से बढ़ा उत्साह
श्यामलाल ठाकुर के अनुसार, लाल मक्की की खेती को लेकर क्षेत्र में अभी जागरूकता की कमी है। बहुत से किसान इस फसल की संभावनाओं से परिचित नहीं हैं। यदि किसानों तक इसकी खेती से जुड़ी जानकारी पहुंचे, तो वे भी इसे अपनी खेती में शामिल करने के बारे में विचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने मक्की की एक अन्य किस्म भी उगाई है, जिसके परिणाम भी अच्छे रहे हैं।
किसानों से छोटे स्तर पर प्रयोग करने की अपील
श्यामलाल ठाकुर ने क्षेत्र के अन्य किसानों से अपील की कि वे नई किस्मों की खेती के बारे में जानकारी जुटाएं और शुरुआत में थोड़ी जमीन पर लाल मक्की उगाकर प्रयोग करें। इससे उन्हें फसल के परिणामों को समझने का अवसर मिलेगा। उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प अपनाने से किसानों को अपनी जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती करने के अवसर मिल सकते हैं।