कुल्लू घाटी में गेहूं, जौ, मटर और लहसुन की खेती प्रभावित होने की आशंका
Summer express/मनमिंदर अरोड़ा | कुल्लू-:जिला कुल्लू में लंबे समय से बारिश न होने के कारण कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसान रबी सीजन की फसलों की बिजाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं। मौसम की बेरुखी ने घाटी के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, ताकि बारिश हो और खेतों में नमी लौटने के बाद बिजाई का काम शुरू किया जा सके। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो गेहूं, जौ, मटर और लहसुन जैसी प्रमुख फसलों की बिजाई में देरी हो सकती है।
जिला कुल्लू में मक्की की कटाई और इससे जुड़े कृषि कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। इसके बाद किसान अब रबी सीजन की तैयारियों में जुटने वाले थे। लेकिन सूखे जैसे हालात के कारण खेतों में हल चलाना और फसलों की बिजाई करना मुश्किल हो गया है। कृषि पर निर्भर रहने वाले परिवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। घाटी में किसान गेहूं और जौ के अलावा मटर, लहसुन तथा अन्य मौसमी सब्जियों की खेती भी करते हैं। इन फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए खेतों में पर्याप्त नमी होना जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद रबी सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कृषि विभाग ने इस बार प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। रबी सीजन 2026-27 के दौरान 7,15,300 मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत विभिन्न जिलों में गेहूं, जौ, चना, मसूर और मटर की खेती के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं। वहीं, वर्ष 2026-27 में प्रदेश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 16,51,700 मीट्रिक टन रहने की परिकल्पना की गई है। ऐसे में मौसम की मौजूदा स्थिति कृषि उत्पादन के निर्धारित लक्ष्यों के सामने चुनौती खड़ी कर सकती है।किसान प्यारेलाल का कहना है कि मक्की का सीजन समाप्त हो चुका है और अब खेतों में गेहूं की बिजाई करने का समय है। लेकिन बारिश न होने के कारण खेतों में नमी नहीं है। इस वजह से किसान चाहकर भी बिजाई का काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर बारिश नहीं हुई तो रबी फसलों की बिजाई में देरी हो सकती है। इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ने की आशंका है।
उझी घाटी के किसान तुले राम ने बताया कि वह सेब की बागवानी के साथ-साथ कृषि कार्य भी करते हैं। घाटी में गेहूं, जौ, मटर और लहसुन प्रमुख फसलें हैं। इनका उत्पादन किसानों की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ उनकी आमदनी का भी साधन है। किसान अपनी जरूरत के लिए अनाज रखने के अलावा अतिरिक्त उपज बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाते हैं। लेकिन लंबे समय से बारिश न होने के कारण खेतों की नमी खत्म हो चुकी है और बिजाई करना संभव नहीं हो पा रहा है।किसानों का कहना है कि समय पर बारिश होना बेहद जरूरी है। यदि मौसम ने जल्द करवट नहीं बदली तो न केवल बिजाई का समय प्रभावित होगा, बल्कि आने वाले दिनों में कृषि उत्पादन पर भी इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल घाटी के किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।