Summer express/शिमला/संजू-: ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच डूबलु पंचायत से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। क्षेत्र के लोगों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि सरकारी मदद की उम्मीद छोड़कर ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया। करीब 10 से 12 वर्षों के संघर्ष के बाद लोगों ने आपसी सहयोग और निजी संसाधनों से सड़क निर्माण का काम पूरा किया।
ग्रामीणों ने अपने दम पर बदली क्षेत्र की तस्वीर
इस सड़क के निर्माण में स्थानीय लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया। वहीं, भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहित ठाकुर ने भी अपने निजी स्तर पर दो लाख रुपये की सहायता प्रदान की। सड़क बनने से अब दो पंचायतों के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा। पहले जहां लोगों को एक पंचायत से दूसरी पंचायत तक पहुंचने के लिए करीब 40 से 45 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था, वहीं अब यह दूरी घटकर महज सात किलोमीटर रह गई है। इससे क्षेत्र के लोगों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
मंत्री की कार्यप्रणाली पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल
भाजपा जिला उपाध्यक्ष मोहित ठाकुर ने इस मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता ने लगातार तीन बार विधायक चुनकर अपना विश्वास जताया और पिछले चार वर्षों से उन्हें मंत्री के रूप में जिम्मेदारी भी मिली हुई है। इसके बावजूद ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। मोहित ठाकुर ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के बजाय मंत्री अपने करीबियों और निजी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कोटी में कॉलेज के अलावा अन्य पंचायतों में उच्च शिक्षा की सुविधाएं विकसित नहीं होने पर भी सवाल खड़े किए।
कानूनी अड़चनों और बजट की कमी से अटका रहा काम
स्थानीय निवासी योगेंद्र शर्मा ने बताया कि दो पंचायतों को जोड़ने वाली इस सड़क के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने लंबे समय तक प्रयास किए। इस दौरान कई सरकारी और कानूनी अड़चनें सामने आईं, लेकिन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार सामूहिक प्रयासों से सड़क का निर्माण संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से दोनों पंचायतों के बीच संपर्क बेहतर होगा और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
पुपलोरा के पास दस साल तक रुका रहा निर्माण
वहीं, स्थानीय निवासी महेशिंद्र सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण का काम करीब दस वर्ष पहले शुरू हुआ था, लेकिन पुपलोरा के पास पहुंचकर काम रुक गया। बजट की कमी और वन अधिकार अधिनियम (FRA) से संबंधित अनुमति नहीं मिलने जैसी समस्याओं के कारण सड़क आगे नहीं बन पाई। इसके बाद ग्रामीणों ने खुद संसाधन जुटाए और कंप्रेसर तथा ब्रेकर मशीनों की मदद से सड़क को जोड़ने का काम पूरा किया।इस सड़क से पयुरन, ब्लॉक पंचायत के साथ ट्राई, लखोठी और छलांडा के लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
विकास के दावों के बीच व्यवस्था पर बड़ा सवाल
डूबलु पंचायत के ग्रामीणों की यह पहल सामूहिक एकजुटता और इच्छाशक्ति की मिसाल जरूर है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाती है कि आखिर ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए अपनी जेब से पैसा क्यों खर्च करना पड़ा? वर्षों तक मांग उठाने और संघर्ष करने के बावजूद समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ? अब सड़क बनने के बाद क्षेत्र के लोगों को राहत तो मिली है, लेकिन सरकारी व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर सवाल बरकरार हैं।