नई दिल्ली | भारत विरोधी रुख और पाकिस्तान के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की के समर्थन ने उसे भारी नुकसान पहुंचाया है। तुर्की की इस रणनीतिक गलती का असर अब उसके टूरिज्म सेक्टर पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। भारतीय पर्यटकों द्वारा बायकॉट के बाद मई 2025 में तुर्की घूमने जाने वाले भारतीयों की संख्या में 24% की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीयों का विरोध असर दिखा गया
तुर्की पर्यटन विभाग के अनुसार, मई 2024 में जहां 41,554 भारतीय पर्यटक तुर्की पहुंचे थे, वहीं मई 2025 में यह संख्या घटकर 31,659 रह गई। एक महीने में ही करीब 10,000 पर्यटकों की कमी तुर्की के टूरिज्म सेक्टर के लिए झटका है, खासकर जब मई-जून का महीना भारत से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का पीक सीजन होता है।
ऑपरेशन सिंदूर में सामने आया तुर्की-पाकिस्तान कनेक्शन
9 और 10 मई की रात भारत द्वारा पाकिस्तान में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान गिराए गए पाकिस्तानी ड्रोनों के मलबे से यह साफ हुआ कि वे तुर्की निर्मित ड्रोन्स थे। इस खुलासे के बाद भारत में सरकारी और जनस्तरीय विरोध तेज हो गया। सोशल मीडिया पर #BoycottTurkey ट्रेंड करने लगा और तुर्की के पर्यटन और उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम ने जोर पकड़ लिया।
ट्रैवल कंपनियों ने तुर्की से दूरी बनाई
भारत की प्रमुख ट्रैवल एजेंसियों — MakeMyTrip, EaseMyTrip और ClearTrip — ने अपने प्लेटफॉर्म से तुर्की टूर पैकेजों को हटा दिया है या प्रमोशन बंद कर दिया है। पहले जो देश यूरोप और मध्य पूर्व के बीच एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल था, वह अब भारतीयों की प्राथमिकता सूची से बाहर होता जा रहा है।
आँकड़ों से झलका असर
2024 में अप्रैल, मई और जून में क्रमशः 31,934, 41,554 और 38,307 भारतीय नागरिक तुर्की गए थे। जबकि 2025 के अप्रैल में यह संख्या घटकर 30,169 और मई में 31,659 रह गई। जून में और गिरावट की आशंका जताई जा रही है। एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र के मुताबिक, बायकॉट का प्रभाव धीरे-धीरे परिलक्षित हो रहा है क्योंकि भारतीय यात्री आमतौर पर अपनी यात्रा पहले से बुक कर लेते हैं। लेकिन जून-जुलाई में यह असर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
तुर्की के लिए चेतावनी भरा संकेत
भारत के विशाल और खर्च करने वाले टूरिस्ट बेस का झुकाव यदि अन्य देशों की ओर होता है, तो यह तुर्की की अर्थव्यवस्था के एक बड़े सेक्टर को प्रभावित कर सकता है। यह घटनाक्रम बताता है कि भारत की जनता अब सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि खुद भी जवाब देने लगी है — वह भी आर्थिक ताकत के ज़रिए।