लखनऊ | उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) जनता की संपत्ति है, किसी की निजी जागीर नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में इस संस्थान को “भ्रष्टाचार का अड्डा” बना दिया गया था।
“संपत्ति को जनता की सेवा में लगाया जाएगा”
पाठक ने कहा कि बीजेपी सरकार ने इस संपत्ति को जनता के हित में लगाने के उद्देश्य से कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर इसे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपा है। उन्होंने साफ किया कि यह निर्णय पारदर्शिता और जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
ब्रजेश पाठक बोले: “अखिलेश यादव इसे निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करना चाहते थे। लेकिन यह जनता की गाढ़ी कमाई से बना है और आम लोगों की सेवा में इस्तेमाल होगा।”
अखिलेश यादव ने लगाए थे BJP पर आरोप
इससे पहले, अखिलेश यादव ने जेपीएनआईसी को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाया था कि यह पूरा कदम एक “पूर्व नियोजित रणनीति” का हिस्सा है, जिसके तहत पहले सोसायटी को भंग किया गया और अब इसे बेचने की तैयारी हो रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संस्थाओं के खिलाफ षड्यंत्र बताया।
“भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का प्रतीक थी सपा सरकार” – पाठक
पाठक ने सपा के 2012–2017 के शासन को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और आपराधिकरण से भरा बताया। उन्होंने दावा किया कि उस समय शासन व्यवस्था “व्यक्तिगत हितों” के लिए संचालित हो रही थी।
गोमती रिवर फ्रंट घोटाले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ सौ करोड़ की योजना में हजारों करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जिससे जनता की गाढ़ी कमाई की “खुली लूट” हुई। यह परियोजना सपा सरकार की आर्थिक अनियमितताओं का उदाहरण है।
“चुनाव आयोग पर सवाल उठाना गैरजिम्मेदाराना”
पाठक ने अखिलेश यादव द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को “गंभीर और गैर-जिम्मेदार” बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश है और इसे जनता माफ नहीं करेगी।