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मिनिमम बैलेंस की टेंशन खत्म? सरकारी बैंक कर सकते हैं बड़ी राहत का ऐलान, नीति में बदलाव की तैयारी

मुंबई | अगर आप भी हर महीने बैंक खाते में न्यूनतम राशि बनाए रखने की चिंता में रहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। देश के कई बड़े सरकारी बैंक इस शर्त को पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रहे हैं।

कैनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पहले ही मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता को हटा दिया है। अब अन्य बैंक भी इसी राह पर चलने की तैयारी में हैं।

वित्त मंत्रालय की बैठक में उठा मुद्दा

हाल ही में वित्त मंत्रालय और प्रमुख बैंकों की एक अहम बैठक में यह विषय प्रमुख एजेंडे के तौर पर सामने आया। मंत्रालय ने सवाल उठाया कि जब आज ज्यादातर बैंकिंग सेवाएं डिजिटल हो गई हैं, तो फिर ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त क्यों?

RBI की रिपोर्ट से मिला संकेत

RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों की जमा संरचना में बदलाव आया है। अब बैंक ज्यादा फोकस फिक्स्ड डिपॉजिट और कमर्शियल पेपर्स जैसे हाई-रिटर्न विकल्पों पर कर रहे हैं, जबकि बचत खातों में जमा घट रही है। यह स्थिति भी मिनिमम बैलेंस पॉलिसी की समीक्षा का कारण बन रही है।

जनधन खातों से सीखा सबक

सरकारी बैंकों को प्रधानमंत्री जनधन योजना से यह सीख मिली है कि बिना न्यूनतम शेष राशि की शर्त के भी खाते सक्रिय रखे जा सकते हैं। शुरुआत में जनधन खाते भले निष्क्रिय रहे हों, लेकिन समय के साथ उनमें ट्रांजैक्शन और बचत बढ़ी है।

SBI पहले ही हटा चुका है नियम

देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) मार्च 2020 में ही न्यूनतम बैलेंस की बाध्यता खत्म कर चुका है। एक RTI से सामने आया था कि इस पेनाल्टी से बैंक को हुई कमाई ने भारी आलोचना बटोरी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

निजी बैंक अब भी सख्त

हालांकि निजी बैंक अभी भी मिनिमम बैलेंस नियम को सख्ती से लागू करते हैं। केवल जनधन, सैलरी और FD से जुड़े खाताधारकों को थोड़ी राहत मिलती है।

क्या होता है न्यूनतम बैलेंस?

न्यूनतम बैलेंस वह राशि है, जिसे खाते में हमेशा बनाए रखना होता है। इस राशि से नीचे जाने पर बैंक पेनाल्टी वसूलता है। सरकारी बैंक अब इस शर्त में ढील दे रहे हैं, जबकि निजी बैंक अब भी सख्त हैं।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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