Faridabaad, 13 July
दिल्ली से सटे फरीदाबाद के अरावली क्षेत्र में बसे ऐतिहासिक अनंगपुर गांव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गांव के लाल डोरा क्षेत्र से बाहर बने निर्माणों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की तलवार लटक रही है। गांववासियों का आरोप है कि उन्हें केवल झूठे आश्वासन मिल रहे हैं। इसी को लेकर सूरजकुंड में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमें देशभर से लोग शामिल हुए। महापंचायत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए गांव को बचाने की रणनीति बनाई गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताया विरोध
फरीदाबाद के अरावली की तलहटी में स्थित अनंगपुर गांव इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लाल डोरा क्षेत्र से बाहर बने निर्माणों को अवैध करार देते हुए जिला प्रशासन को तोड़फोड़ के आदेश दिए गए हैं। इसे लेकर गांव में भय का माहौल है।
गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर से भी मुलाकात की थी, लेकिन मंत्री ने उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि मंत्री ने कहा कि “अभी तोड़फोड़ नहीं होगी” यानी बाद में हो सकती है – जिससे लोगों का भरोसा टूट चुका है।गांव को बचाने और प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए रविवार को सूरजकुंड में एक देशव्यापी महापंचायत बुलाई गई, जिसमें देशभर से गुर्जर और 36 बिरादरी के लोग जुटे। सभी ने एक सुर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ आवाज उठाई और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।
गांववासियों का कहना है कि बीजेपी सरकार जानबूझकर अनंगपुर के निर्माणों को निशाना बना रही है। महापंचायत में लिए गए फैसलों के आधार पर अब आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी।
तस्वीरें फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके की हैं, जहां अनंगपुर गांव के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आदेश के तहत गांव के लाल डोरा के बाहर बने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई होनी है।गांव में पहले से ही फार्म हाउस और रिहायशी निर्माण को लेकर कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। अब कोर्ट का आदेश आने के बाद फरीदाबाद प्रशासन ने इस इलाके में तोड़फोड़ की तैयारी तेज कर दी है।इससे परेशान होकर ग्रामीण न सिर्फ केंद्रीय नेताओं से मिले बल्कि सूरजकुंड में बड़ी महापंचायत भी की, जिसमें हजारों लोग जुटे।
इस मौके पर पूर्व सांसद अवतार भड़ाना, कांग्रेस नेता विजय प्रताप, पूर्व विधायक नीरज शर्मा, किसान यूनियन के नेता और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। पंचायत में तय किया गया कि गांव को बचाने के लिए अब संघर्ष को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा।