ढाका | बांग्लादेश के गोपालगंज जिले से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर एक भीषण और शर्मनाक हमला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को दहशत में डाल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार रात कर्फ्यू के बीच जमात-ए-इस्लामी से जुड़े चरमपंथियों ने कथित रूप से सेना की मौजूदगी में हिंदू घरों को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हैं।
योजनाबद्ध हमला, घरों में लगाई आग
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह हमला पूरी तरह योजनाबद्ध था। कई घरों में आग लगा दी गई और लोगों को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। सबसे गंभीर आरोप ये हैं कि चार हिंदू लड़कियों को हमलावर जबरन साथ ले गए, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। इस घटना का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि सरकारी पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
दहशत में पलायन, सरकार अब तक चुप
इलाके में कर्फ्यू लागू होने के बावजूद हिंसा रुक नहीं रही है। बड़ी संख्या में हिंदू परिवार डर के चलते अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह वही इलाका है जिसे प्रधानमंत्री शेख हसीना का गृह जिला माना जाता है।
राजनीतिक झड़पों से पहले ही तनाव में था इलाका
इस हिंसा से एक दिन पहले ही गोपालगंज में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और नेशनल सिटिजन पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई थी। रैली रोकने के लिए रास्तों में पेड़ काटकर गिरा दिए गए, कई सरकारी गाड़ियों को आग के हवाले किया गया और रैली स्थल पर हमला किया गया। इसमें अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत और दर्जनों घायल हो चुके हैं। इस झड़प के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा भी फायरिंग किए जाने की खबर है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे सवाल
ताजा हमले ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि लापता लड़कियों को जल्द ढूंढा जाए और हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निगाहें टिक गई हैं।