Mandi, Dharamveer
मंडी जिला की सराज विधानसभा के अति दुर्गम क्षेत्र पखरैर पंचायत में 30 जून की रात को आई आपदा के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस पंचायत में सड़क और बिजली आपूर्ति अब तक पूरी तरह से ठप्प है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री तो पहुंची है, लेकिन टूटी सड़कों और खतरनाक रास्तों के कारण 5 किलो राशन भी पीठ पर उठाकर घर तक ले जाना मुश्किल हो गया है।
11 लोग लापता
11 लोग अब तक लापता, 9 मकान और 48 गौशालाएं बह चुकी हैं। कई घर रहने लायक नहीं बचे हैं। 70 प्रतिशत सेब की फसल और पॉलीहाउस भी बर्बाद हो गए हैं।
ग्रामीणों की आपबीती
पंचायत के देजी गांव के रितिक ठाकुर ने बताया कि गांव का शायद ही कोई घर बचा हो जो आपदा से अछूता हो। “हमारे गांव में 5 लोग एक साथ मकान सहित बह गए, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। बच्चों के स्कूल जाने के रास्ते टूट गए हैं, जिससे प्राथमिक विद्यालय लांबसाफरड भी बंद है।”धर्म चंद और अमी चंद जैसे अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शिकारी देवी की पहाड़ियों से आई तबाही ने उनके पशुधन को भी निगल लिया — 108 भेड़-बकरियां और 9 गौशालाएं बह चुकी हैं।
पंचायत प्रमुख की चिंता
ग्राम पंचायत पखरैर की प्रधान मोनिका ठाकुर ने बताया कि पंचायत में 406 परिवार रहते हैं और सभी किसी न किसी रूप में आपदा से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि “17 दिन बाद भी सड़क और बिजली सेवा बहाल नहीं हुई है। पानी की आपूर्ति भी अभी पूरी तरह से नहीं हो पाई है। पंचायत अपने स्तर पर रास्ते बहाल करने की कोशिश में जुटी है।”
दुनिया से कटा रहा पखरैर
बता दें कि यह पंचायत शिकारी देवी से मात्र 10 किमी दूर है। 30 जून की रात बादल फटने से आए भीषण सैलाब ने सबसे पहले इसी पंचायत को निशाना बनाया। इसके बाद यह क्षेत्र शेष दुनिया से पूरी तरह कट गया था। एनडीआरएफ की टीम 5वें दिन यानी 4 जुलाई को जोखिम उठाकर यहां पहुंच सकी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हो पाया।ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और सरकार प्राथमिकता के आधार पर यहां की सड़क और बिजली व्यवस्था को बहाल करे, ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके और बच्चों की पढ़ाई समेत सामान्य जीवन फिर से शुरू हो सके।