चंडीगढ़ | पंजाब में खेती, जमीन और पानी जैसे बड़े मुद्दों को लेकर शुक्रवार को किसान भवन में संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में ऑल पार्टी मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में 11 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन आम आदमी पार्टी का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, जिसे लेकर किसानों ने नाराजगी जताई।
बैठक में चार अहम प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बनी –
- पंजाब सरकार की ‘लैंड पूलिंग’ नीति को रद्द करने की मांग।
- देश में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को रद्द किया जाए।
- पंजाब के पानी को लेकर हुए पुराने सभी समझौते खत्म किए जाएं।
- सहकारिता लहर (कोऑपरेटिव मूवमेंट) को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने इन चारों प्रस्तावों को संयुक्त रूप से पास करने की जानकारी दी और बताया कि अब यह मुद्दे सिर्फ आंदोलन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राजनीतिक दबाव भी बनाया जाएगा। वहीं, किसान नेता डॉ. दर्शन पाल सिंह ने चेतावनी दी कि अगर पंजाब सरकार ने लैंड पूलिंग नीति वापस नहीं ली, तो जिला स्तर पर कैंडल मार्च और व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।
आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी पर भी छिड़ा सियासी विवाद। किसान नेताओं ने इसे किसानों के मुद्दों से दूरी करार दिया और कड़ी आलोचना की।
यह मीटिंग यह साफ संकेत देती है कि आने वाले दिनों में पंजाब में किसान आंदोलन एक बार फिर तेज हो सकता है – इस बार राजनीतिक दलों के समर्थन के साथ।