21 July, 2025
हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा अत्यंत पूजनीय माना गया है। यह न केवल औषधीय गुणों से भरपूर होता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। अधिकतर लोग तुलसी को प्रतिदिन जल अर्पित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सप्ताह में एक दिन ऐसा भी आता है जब तुलसी को जल चढ़ाना वर्जित माना गया है?
एकादशी के दिन क्यों नहीं चढ़ाया जाता तुलसी को जल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन तुलसी जी को जल अर्पित नहीं किया जाता। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है, और तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता व्रत रखती हैं और विश्राम करती हैं, इसलिए उन्हें जल चढ़ाना निषेध माना गया है।
पुराणों में उल्लेख
स्कंद पुराण और पद्म पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में यह स्पष्ट किया गया है कि एकादशी के दिन तुलसी को जल देने से पुण्य की बजाय दोष लगता है। इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना भी वर्जित है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु अप्रसन्न हो सकते हैं।
क्या करें एकादशी पर?
– एकादशी के दिन तुलसी के समीप दीपक जलाएं
– तुलसी के सामने भगवान विष्णु का स्मरण करें
– तुलसी को छुए बिना ही उन्हें प्रणाम करें
ज्योतिषाचार्य की सलाह
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश मिश्रा के अनुसार, “एकादशी को जल चढ़ाने से तुलसी माता के नियमों का उल्लंघन होता है। यदि कोई भूलवश ऐसा कर बैठता है, तो उसे भगवान विष्णु से क्षमा याचना करनी चाहिए और तुलसी माता से भी क्षमा मांगनी चाहिए।
निष्कर्ष: धार्मिक परंपराओं में निहित विज्ञान और श्रद्धा का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। तुलसी को जल चढ़ाना अत्यंत पुण्यकारी है, लेकिन एकादशी के दिन इसका त्याग कर केवल श्रद्धा से प्रणाम करना ही उचित माना गया है।