Mandi, Dharamveer
चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर मंडी जिले के पंडोह क्षेत्र में कैंचीमोड़ से डयोड़ तक लगातार हो रहे भूस्खलन से हाईवे को भारी नुकसान हो रहा है। एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पुणे की एक विशेषज्ञ कंपनी को नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने का जिम्मा सौंपा है।
वरुण चारी बोले — “पहाड़ियों में चट्टानों की कमी बना रही खतरा”
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने जानकारी दी कि इस क्षेत्र की पहाड़ियों में ठोस चट्टानों की कमी है, जिसके कारण हल्की सी बारिश में भी मलबा सीधे हाईवे पर गिर रहा है। इससे एनएचएआई द्वारा बनाए गए सुरक्षात्मक डंगे भी प्रभावित हुए हैं — कई डंगे ढह गए हैं और कई में गंभीर दरारें आ चुकी हैं।
हर बारिश में दोहराता है संकट
चोरी ने कहा, “कैंचीमोड़ से डयोड़ टनल तक एक जैसी स्थिति बनी हुई है। मलबे से हाईवे को बार-बार नुकसान हो रहा है, जिससे एनएचएआई को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब विशेषज्ञ कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर नई तकनीक से सुरक्षित समाधान लागू किए जाएंगे।”
आज फिर चार घंटे बंद रहा हाईवे
आज सुबह भी कैंचीमोड़ के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिसके कारण हाईवे करीब 4 घंटे तक बंद रहा। पंडोह पुलिस चौकी प्रभारी अनिल कटोच ने बताया कि यह लैंडस्लाइड तड़के 4 बजे हुआ और लगातार बारिश के कारण मलबा हटाने में देरी हुई। सुबह 6 बजे मशीनें मौके पर पहुंचीं और 8 बजे तक हाईवे को एकतरफा यातायात के लिए खोल दिया गया।
ब्यास किनारे फिर धंसा हाईवे का हिस्सा
उधर, कैंचीमोड़ के समीप ब्यास नदी किनारे हाईवे का एक हिस्सा फिर से धंस गया है। वर्ष 2023 की आपदा में यह हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका था और अब हर मानसून में यही स्थिति दोहराई जा रही है। वर्तमान में इस क्षेत्र से वाहनों को केवल एकतरफा ही निकाला जा रहा है।