Shimla, Sanju-
भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी पर मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव को लेकर मंदिरों और बाजारों में रौनक छा गई है। इस बार पर्व की सही तिथि को लेकर भक्तों में उलझन है। शिमला स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित उमेश प्रसाद नौटियाल ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष दो दिन मनाया जाएगा।
गृहस्थजन 15 अगस्त को व्रत रखेंगे और 16 अगस्त की सुबह व्रत का पारण करेंगे। वहीं, वैष्णवजन 16 अगस्त को निशीथ काल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे और 17 अगस्त की सुबह व्रत का पारण करेंगे।पंडित नौटियाल ने बताया कि स्मार्त परंपरा से जुड़े लोग 16 अगस्त की रात 12:05 से 12:47 बजे तक पूजा कर सकेंगे। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए तन-मन से पवित्र होकर दूध, दही, घी, शहद, तुलसी, पंचामृत, पंजीरी और शक्कर रखना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि पूजा की शुरुआत चौकी पर पीले वस्त्र बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करने से करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से स्नान कराएं, गंगाजल से अभिषेक करें और सुंदर श्रृंगार करें।