Shimla, 27 August
हिमाचल प्रदेश में भारत का पहला राज्य-सहयोग से संचालित बायोचार कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिला हमीरपुर के नेरी में अगले छह महीने के भीतर बायोचार संयंत्र स्थापित किया जाएगा।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में ओक ओवर, शिमला में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoA) हस्ताक्षरित हुआ। यह समझौता डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, हिमाचल प्रदेश वन विभाग और चेन्नई स्थित प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इससे जंगल की आग की घटनाओं पर रोक लगेगी, साथ ही समुदायों के लिए आजीविका और जागरूकता के अवसर भी बढ़ेंगे।कार्यक्रम के तहत चीड़ की पत्तियां, लैंटाना, बांस और अन्य बायोमास से बायोचार तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार ने निर्देश दिए कि छह माह के भीतर यह समझौता लागू किया जाए ताकि कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, चंबा, बिलासपुर और सोलन के लोगों को सीधा लाभ मिल सके।बायोमास संग्रह करने वाले स्थानीय लोगों को ₹2.50 प्रति किलो भुगतान किया जाएगा और गुणवत्ता बनाए रखने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। अनुमान है कि यह कार्यक्रम प्रति वर्ष लगभग 50,000 श्रम-दिवस आय उत्पन्न करेगा। इसके अलावा, प्रत्यक्ष रोजगार और कौशल विकास प्रशिक्षण भी उपलब्ध होंगे।यह योजना दस वर्षों तक चलेगी और इस दौरान 28,800 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने की संभावना है। प्रोक्लाइम सर्विसेज इस परियोजना में एक मिलियन अमेरिकी डॉलर तक का निवेश करेगी।
विश्वविद्यालय संयंत्र स्थापना के लिए नेरी, हमीरपुर में तीन एकड़ भूमि उपलब्ध करवाएगा, जबकि वन विभाग सतत बायोमास संग्रहण, परमिट और निगरानी का कार्य करेगा।इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, नगर निगम महापौर सुरेन्द्र चौहान, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल संजय सूद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर ठाकुर और कंपनी प्रतिनिधि उपस्थित थे।