Summer express, राहुल चावला , कांगड़ा | पेशे से चिकित्सक और जुनून से पक्षी प्रेमी एवं बर्ड फोटोग्राफर डॉ. अभिनव चौधरी ने कहा है कि प्रकृति और पक्षियों के प्रति लगाव ने उन्हें पिछले दो दशकों से अधिक समय तक हिमाचल के जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने 600 से अधिक पक्षी प्रजातियों का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया, 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए और कई दुर्लभ पक्षियों का दस्तावेजीकरण कर वैज्ञानिक समुदाय को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने यह बातें एक विशेष बातचीत के दौरान साझा कीं।
डॉ. अभिनव चौधरी ने बताया कि पक्षियों को देखने का शौक बचपन से था। शुरुआत केवल दूरबीन के सहारे हुई, लेकिन समय के साथ पुस्तकों, कैमरे और आधुनिक तकनीक ने उनकी जानकारी और अनुभव को और समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि कैमरे की मदद से न केवल पक्षियों की पहचान आसान हुई, बल्कि उनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करना भी संभव हो सका।
उन्होंने बताया कि डॉक्टर होने के बावजूद उन्होंने अपने पेशे और शौक के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखा। छुट्टियों या ड्यूटी से पहले मिलने वाले समय में ही वे बर्डिंग करते हैं और कभी भी अपने पेशे को प्रभावित नहीं होने देते।
डॉ. चौधरी ने कहा कि लाहौल-स्पीति, पांगी और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पक्षियों की फोटोग्राफी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। वहां पक्षियों की संख्या कम होती है और उन्हें देखने के लिए कई किलोमीटर तक कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि स्थानीय बर्डर्स और मित्रों के सहयोग से उन्हें हिमाचल में कई दुर्लभ पक्षियों का रिकॉर्ड बनाने का अवसर मिला।
उन्होंने येलो-ब्रेस्टेड बंटिंग, पर्पल बैक स्टारलिंग, लिटिल क्रेक और अन्य दुर्लभ पक्षियों की फोटोग्राफी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कई बार सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा के बाद भी पक्षी नहीं मिलते, लेकिन जब दुर्लभ प्रजाति कैमरे में कैद हो जाती है तो सारी मेहनत सफल लगती है। हिमाचल के राज्य पक्षी वेस्टर्न ट्रेगोपैन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों से शिकार और मानव गतिविधियों के कारण यह पक्षी अत्यंत संवेदनशील हो चुका है। इसकी तस्वीर लेने के लिए कई दिनों तक जंगलों में रहकर धैर्यपूर्वक इंतजार करना पड़ता है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि अब तक उन्होंने लगभग 600 पक्षी प्रजातियों और 25 उप-प्रजातियों का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया है। हिमाचल में पहली बार दर्ज हुई लगभग 30 पक्षी प्रजातियों की खोज में भी उनका योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि उनके 60 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं तथा उनके शोध कार्यों के आधार पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच “बर्ड्स ऑफ द वर्ल्ड” में लेखन का अवसर मिला। साथ ही उन्हें देश की प्रतिष्ठित पत्रिका “इंडियन बर्ड्स” के संपादकीय बोर्ड का सदस्य भी बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि वन्यजीव विभाग के साथ उनका लगातार समन्वय रहता है। विभिन्न पक्षी गणना अभियानों, सर्वेक्षणों और संरक्षण गतिविधियों में वे नियमित रूप से भाग लेते हैं तथा विभाग को आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी और फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराते हैं।
पर्यावरण संरक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास होना चाहिए जिससे प्रकृति और वन्यजीवों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। अनियंत्रित कटान, आर्द्रभूमियों के खत्म होने, अवैध गतिविधियों और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के कारण कई पक्षी प्रजातियां तेजी से कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पक्षी, जो पहले हिमाचल में सामान्य रूप से दिखाई देते थे, अब लगभग गायब हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पक्षी फोटोग्राफी उनके लिए कमाई का माध्यम नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने, नई वैज्ञानिक जानकारी जुटाने और समाज को जागरूक करने का माध्यम है। इससे उन्हें मानसिक संतोष भी मिलता है और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का अवसर भी मिलता है।
अपने 23 वर्षों के इस सफर का श्रेय उन्होंने अपने परिवार और बर्डिंग से जुड़े मित्रों को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका सहयोग किया और नई प्रजातियों की जानकारी साझा कर उनके शोध कार्य को आगे बढ़ाया।
युवाओं के लिए संदेश देते हुए डॉ. अभिनव चौधरी ने कहा कि मोबाइल फोन पर अत्यधिक समय बिताने के बजाय प्रकृति से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी सकारात्मक हॉबी व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। साथ ही युवाओं से नशे से दूर रहकर अपने लक्ष्य और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का भी आह्वान किया।