नई दिल्ली | फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रुपए की विनिमय दर में हालिया गिरावट पर कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू मुद्रा की कमजोरी केवल अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में है और यह सिर्फ रुपए का मामला नहीं है, बल्कि कई अन्य देशों की मुद्राओं पर भी असर पड़ा है।
सीतारमण ने कहा कि अमेरिकी शुल्क से निर्यातकों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए संबंधित मंत्रालय और विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को रुपया गिरावट से उबरते हुए 88.09 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि एक दिन पहले यह 88.12 पर बंद था। दो सितंबर को यह अबतक के सबसे निचले स्तर 88.15 तक गिर चुका था।
वित्त मंत्री ने आगे बताया कि “50 प्रतिशत अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क 27 अगस्त से लागू हुआ है। सरकार संबंधित मंत्रालयों और विभागों के माध्यम से निर्यातकों से इस पर जानकारी जुटा रही है ताकि उन्हें आवश्यक सहायता मिल सके। उद्योग अभी तक शुल्क के प्रभाव का आंकलन नहीं कर पाया है।”
अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया। इसके चलते झींगा, रत्न और आभूषण, कपड़ा और अन्य क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका है।
चीनी बाजार के संबंध में सीतारमण ने कहा कि भारत लगातार चीन के साथ व्यापार वार्ता कर रहा है और इसके लिए बातचीत जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया व्यापारिक बातचीत का हिस्सा है और इसमें ‘प्रेस नोट 3’ का कोई लेना-देना नहीं है। प्रेस नोट 3 के तहत अप्रैल 2020 में एफडीआई नीति में संशोधन किया गया था, जिससे चीन सहित सीमावर्ती देशों से निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी, ताकि भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण को नियंत्रित किया जा सके।