होशियारपुर | न्यू दीपनगर के पांच साल के बच्चे हरवीर का शव रहीमपुर श्मशानघाट के पास मिला था। आरोपी ने बच्चे का अपहरण कर हत्या कर दी थी। मृतक का शव सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद उसके परिजनों को सौंपा गया। अस्पताल में कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे और उन्होंने आरोपी को सख्त सजा, संभवतः फांसी की मांग की।
शहर में लोगों का रोष
नगर निगम के मेयर सुरेंद्र कुमार को भी लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। नागरिकों ने सवाल उठाया कि शहर में बिना वैरिफिकेशन कई लोग रह रहे हैं, जिनमें कुछ क्रिमिनल भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वोट और आधार कार्ड संबंधी प्रक्रियाओं में कड़ी निगरानी आवश्यक है।
हरवीर का अंतिम संस्कार
मृतक हरवीर का भानोकी (फगवाड़ा के पास) में अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने बताया कि बेटे का शव खून से लथपथ था, जिससे उसकी बेरहमी स्पष्ट होती है। उन्होंने आरोपी के साथ दो अन्य व्यक्तियों, पिंकी और दीपू, की गिरफ्तारी की भी मांग की।
पिता ने आशंका जताई कि हत्या से पहले किसी तंत्र-मंत्र या अनुष्ठान का इस्तेमाल किया गया हो। गांव के सरपंच कुंदन सिंह ने सरकार से फौरन कार्रवाई करने की मांग की।
पुलिस वैरिफिकेशन की जरूरत
मेयर सुरेंद्र कुमार ने कहा कि बाहरी लोगों की पुलिस वैरिफिकेशन जरूरी है। कई लोग वैरिफिकेशन के दौरान हट जाते हैं और बाद में फिर आकर बस जाते हैं।
डॉ. रमन घई ने कहा कि अगर पुलिस वैरिफिकेशन कड़ाई से किया जाए तो कई संदिग्ध, बांग्लादेशी नागरिक भी पकड़े जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना निंदनीय है और भविष्य में ऐसे अपराध रोकने के लिए सभी संगठनों को मिलकर काम करना होगा।
प्रशासन की सक्रियता पर सवाल
शिवसेना नेता रणजीत राणा ने कहा कि प्रशासन केवल घटना के बाद जागता है। उन्होंने अदालत में मामले को तेज़ी से चलाकर आरोपी को फांसी देने की मांग की।
बच्चों की सुरक्षा पर जोर
निहंग जत्थेबंदियों के नेताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों को उनके कर्मों का फल जेल में भी भुगतना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन
हरवीर की हत्या के विरोध में विभिन्न संगठनों ने प्रभात चौक तक रोष मार्च निकाला। लोगों ने चेतावनी दी कि अगर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो संघर्ष और तेज होगा। उन्होंने कहा कि बिना वैरिफिकेशन किसी को भी शहर में नहीं रहने देना चाहिए।
परिवार का गहरा दुःख
सिविल अस्पताल में हरवीर के पिता और बहन का विलाप देखने लायक था। बहन बार-बार पिता से लिपटकर अपने भाई को याद कर रही थी। माता को भी सांत्वना दी जा रही थी, लेकिन माता का दुःख शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता।