Delhi, 15 September
भारत की राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहते हुए किसी राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया हो। अधिकांश प्रधानमंत्रियों का राजनीतिक अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर ही रहा, लेकिन नरेन्द्र मोदी इस दृष्टि से अलग हैं।
2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले, वे गुजरात में एक दशक से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे और वहीं से उन्होंने शासन का एक ऐसा दृष्टिकोण विकसित किया जिसने भारतीय राजनीति और प्रशासन को नई दिशा दी। उनका फोकस सिर्फ नीति-निर्माण पर नहीं, बल्कि कारगर क्रियान्वयन पर रहा। यही दृष्टिकोण अब “भारतीय शासन मॉडल” के रूप में स्थापित हो चुका है।
क्रियान्वयन: नीति से ज़्यादा ज़रूरी
गुजरात में बिजली आपूर्ति की खामियों से सीख लेकर मोदी ने ज्योतिग्राम योजना लागू की। प्रधानमंत्री बनने के बाद इसे दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के रूप में आगे बढ़ाया, जिससे लाखों गांवों में भरोसेमंद बिजली पहुंची। इसी तरह, जन-धन योजना ने बैंकिंग को सक्रिय बनाया और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की नींव रखी।
आवास क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना ने तकनीकी साधनों (जियो-टैगिंग, निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण) से पारदर्शिता बढ़ाई और पहली बार लाभार्थियों को पूरा घर मिला।
संघवाद को ताकत बनाना
गुजरात का अनुभव बताता है कि विकास राज्य और केन्द्र के तालमेल से ही संभव है। मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर इसे सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के रूप में लागू किया।
- जीएसटी परिषद ने वित्तीय संवाद को संस्थागत किया।
- राज्यों को अधिक कर हिस्सा देकर वित्तीय स्वायत्तता दी गई।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग से राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला।
कल्याण को उत्पादकता से जोड़ना
कल्याणकारी योजनाओं को मोदी ने केवल सहायता नहीं, बल्कि निवेश माना।
- गुजरात की कन्या केलवणी पहल राष्ट्रीय स्तर पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ बनी, जिसने शिक्षा और लिंगानुपात दोनों पर असर डाला।
- मातृ स्वास्थ्य की चिरंजीवी योजना राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बदली, जिससे करोड़ों महिलाओं को लाभ मिला।
विश्वसनीयता और भरोसा
गुजरात का “वाइब्रेंट गुजरात” अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर मेक इन इंडिया में बदला। 2014 से 2024 के बीच भारत ने रिकॉर्ड एफडीआई आकर्षित किया।
नागरिकों के स्तर पर भी बदलाव आया। पहले योजनाएं घोषणाओं तक सीमित थीं, आज लोग मानते हैं कि बिजली, गैस, बैंक खाते और शौचालय जैसी सुविधाएं वास्तव में उन तक पहुंचेंगी।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” अब नारा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की हकीकत है। डिजिटल समन्वय, पारदर्शी क्रियान्वयन और अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने की नीति ने शासन का नया भारतीय मॉडल गढ़ा है।भारत जब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा, तो इसमें उस शासन दृष्टिकोण की अहम भूमिका होगी जिसे मोदी ने गुजरात से लेकर पूरे देश में स्थापित किया। यही उनकी स्थायी और निर्णायक विरासत है।