Summer express/नूरपुर ,संजीव -: भीषण गर्मी के इस दौर में जहां इंसान खुद को गर्मी से बचाने के उपाय खोज रहा है, वहीं कुछ संवेदनशील समाजसेवी जंगलों में रहने वाले बेजुबान जीवों की प्यास बुझाने के लिए आगे आए हैं। विधानसभा क्षेत्र इंदौरा के भदरौआ, लोदवां, टिपरी और महकड़ सहित आसपास के वन क्षेत्रों में समाजसेवियों द्वारा सूख चुके तालाबों में पानी भरने का अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वन्यजीवों और पक्षियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
गर्मी के बढ़ते प्रकोप के कारण जंगलों में मौजूद कई प्राकृतिक जलस्रोत और तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। पानी की कमी के चलते जंगली जानवरों, पक्षियों और अन्य जीवों को पीने के पानी की तलाश में दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा था। इस गंभीर समस्या को देखते हुए समाजसेवी गुरु राजीव वशिष्ठ के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने मिलकर इन तालाबों को दोबारा पानी से भरने का बीड़ा उठाया है।समाजसेवियों द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के तहत पानी के टैंकरों की सहायता से जंगलों के सूखे तालाबों में पानी पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल वन्यजीवों की प्यास बुझ सकेगी बल्कि उन्हें पानी की तलाश में जंगलों से बाहर आने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। इससे मानव और वन्यजीव संघर्ष की संभावनाएं भी कम होंगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहल केवल पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देती है। समाजसेवियों का यह प्रयास क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है और कई लोग इस अभियान से जुड़कर अपना सहयोग देने के लिए आगे आ रहे हैं।
गुरु राजीव वशिष्ठ ने बताया कि उनकी टीम पिछले कई वर्षों से गर्मियों के मौसम में जंगलों के सूखे तालाबों में पानी भरने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष तापमान बढ़ने के साथ जंगलों में जल संकट गहराने लगता है, जिससे वन्यजीवों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी टीम नियमित रूप से ऐसे क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था करती है।उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी टिपरी और महकड़ क्षेत्र के तालाबों में पानी भरने का कार्य किया जा रहा है। इस सेवा कार्य में कई ऐसे सहयोगी भी शामिल हैं जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के निस्वार्थ भाव से मदद कर रहे हैं।समाजसेवियों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे भी पक्षियों और वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। यह पहल दर्शाती है कि सेवा और संवेदनशीलता से किया गया छोटा-सा प्रयास भी हजारों बेजुबान जीवों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है।