Summer express/हमीरपुर, अरविंद -:पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल सत्ता का सुख भोगने में व्यस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार को आम लोगों के सुख-दुख से कोई सरोकार नहीं रह गया है और उसकी कार्यशैली पर अब विपक्ष ही नहीं, बल्कि उसके अपने नेता भी सवाल उठा रहे हैं।
हमीरपुर स्थित परिधि गृह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अनुराग ठाकुर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यदि सरकार की कार्यप्रणाली पर विपक्ष सवाल उठाता तो बात अलग थी, लेकिन कांग्रेस के अपने ही वरिष्ठ नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोप सरकार की स्थिति को स्पष्ट करते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में कांग्रेस के एक पदाधिकारी द्वारा अटैचियों से जुड़े बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे मामलों में सरकार को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।इस दौरान अनुराग ठाकुर ने ‘नॉऊ फॉर क्लाइमेट’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण भी किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और मौसम के बदलते स्वरूप चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि एक पेड़ प्रतिवर्ष लगभग 22 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है। यदि बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जाए तो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए सभी को प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी निभानी होगी।
मुख्यमंत्री के एक हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों को कमतर आंकना उचित नहीं है। ठाकुर ने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को व्यापक जनसमर्थन मिला है, जिसे कांग्रेस स्वीकार नहीं कर पा रही है।
रेल परियोजनाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन से जुड़ी बड़ी वित्तीय देनदारी अभी लंबित है। ऐसे में नई रेल परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।